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Sunday, June 15, 2008

पाकिस्तान ने फाइनल मैच जीता

ढाका. पाकिस्तान ने भारत को 25 रन से हराकर तीन देशों के बीच खेली गई त्रिकोणिय सीरिज का फाइनल मैच में जीत लिया है। पाकिस्तान की जीत में उमरगुल 4 विकेट , यूनिस खान 108 और सलमान बट्ट 127 का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पाकिस्तान के बल्लेबॉज यूनिस खान को मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया है।

315 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारत की पूरी टीम 290 रन बनाकर आउट हो गई । भारत की तरफ से युवराज सिंह 59 और धोनी 64 रन का स्कोर किया।

मैन ऑफ द सीरिज : सलमान बट़ट सलमान बट्ट को इस त्रिकोणिय सीरिज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया है ।

माही- युवी की दोस्ती में दरार!

मुंबई.यूरो कप फुटबॉल के कारण वनडे टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उपकप्तान युवराज सिंह की दोस्ती में दरार पड़ गई है। माना जा रहा है कि यूरो कप के एक मैच में युवराज के बतौर चीफ गेस्ट जाने को लेकर धोनी उनसे नाराज हैं।

धोनी का कहना है कि युवराज को 15 जून को स्विटजरलैंड जाना है और इसी दिन किट प्लाई सीरीज के फाइनल मैच का रिजर्व डे है। ऐसे में युवराज टीम इंडिया को छोड़कर कैसे जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार धोनी को यूरो कप फुटबॉल के एक मैच में मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार देने के लिए 15 जून को आमंत्रित किया गया था। धोनी ने आमंत्रण यह कह कर ठुकरा दिया कि 14 जून को त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज का फाइनल मैच है और 15 जून को रिजर्व डे। यदि 14 जून को बारिश के कारण मैच नहीं हुआ तो रिजर्व डे को मैच संभव है। ऐसे में वे टीम को छोड़ कर कैसे जा सकते हैं। जब धोनी नहीं माने तो आयोजकों ने युवराज से संपर्क साधा। युवी ने कप्तान धोनी से सलाह मशविरा किए बिना ही इस ऑफर को स्वीकृति दे दी। बस धोनी इसी बात पर युवराज से खफा हैं।

उनका कहना है, ‘युवी टीम के उपकप्तान हैं अत: जब टीम हित में मैं मना कर सकता हूं तो युवी क्यों नहीं’। बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह ने स्पष्ट किया है कि युवी ने स्विटजरलैंड जाने के लिए बीसीसीआई से अनुमति ली थी। उन्हें बीसीसीआई की ओर से कहा गया कि यदि रिजर्व डे में मैच की जरूरत नहीं पड़े तो वे जा सकते हैं।

कप्तानी की इच्छा तो नहीं

युवी टीम के उपकप्तान हैं और कई बार वे कप्तानी की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। वैसे उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि महेंद्र सिंह धोनी को हटाकर कप्तान बनना वे कतई नहीं चाहेंगे। युवराज सिंह और धोनी में यदि जल्दी विवादों का अंत नहीं होता है तो टीम पर इसका विपरीत असर पड़ेगा जबकि टीम के सीनियर्स सौरव, राहुल व सचिन तेंडुलकर के रहते ऐसा कभी नहीं होता था।

Monday, May 19, 2008

कॉफी घटाती व शराब बढ़ाती है स्तन कैंसर का खतरा

स्टॉकहोम. स्तन कैंसर जो महिलाएं दिन में कम से कम तीन कप कॉफी पीती हैं उनमें स्तन कैंसर की संभावना कम होती है, लेकिन शराब का अधिक सेवन इसकी संभावना बढ़ा सकती है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।

स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय और माल्मो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में पाया है कि कॉफी महिलाओं में स्तन कैंसर को बढ़ावा देने वाले उपापचयी उत्पादों (मेटाबोलिक प्रोडक्ट्स) के रिसाव की गति को धीमा करती है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में पाई जाने वाली कैफीन भी महिलाओं में कैंसर की कोशिकाओं के विकास में बाधक होती है।

शोधकर्ताओं ने स्तन कैंसर से पीड़ित 450 महिलाओं के कॉफी और शराब पीने की आदतों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि कॉफी पीने से उनके कुछ खास जीन में सकारात्मक प्रभाव देखे गए। शोधकर्ताओं ने बताया कि जो महिलाएं कॉफी पीती हैं उन्हें कैंसर होने की संभावना औरों से कम होता है।

वहीं जो महिलाएं दिन में दो बार से अधिक शराब पीती हैं उनमें स्तन कैंसर होने की संभावना 30 फीसदी ज्यादा होती है।

गौरतलब है विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हर साल स्तन कैंसर से विश्वभर में पांच लाख से अधिक महिलाओं की मौत होती है।

Thursday, May 1, 2008

Valentine Sms

हर मुलाक़ात पे निगाहें मेरी फ़र्याद करती यही
एक पलट नज़र से देखलें वह कभी
और वह बिन देखे ही अनदेखा कर जाती हैं
रह जाती हैं मेरी तमन्नाएं दिल में दबी….

क्या समझेंगी वह इस दिल की दर्द को
खोयी जो हैं वह अपने ही जहाँ में
क्या महसूस होगी उनको मेरी तड़प
शामिल जो हैं वह इस दुनिया की महफिल में…..

न ख़ुद समझे न समझा सके हम उन्हें
न पाए कभी न कभी खो सके उन्हें
यह बेखुदी तोह रब भी न जाने
इस दिल का नजराना न दिला सके हम उन्हें….

अपना प्यार को छुपा न सके,
दीवाना दिल पे काबू पा न सके,
आज इतने करीब सा गुज़र गए वो
फिर बी उनके हाथ हम थम न सके!!

शायरी

खुदा ने जब तुम्हे बनाया होगा
तू उससके दिल पे एक सरूर चाय होगा
सोचा होगा की तुझको जानत में रखूँ
फ़िर उस्सको मेरा ख्याल आया होगा

खुशबू की तरह आपके पास बिखर जायेंगे,
सकूं बन कर दिल में उतर जायेंगे,
महसूस करने की कोशिश तो कीजिये,
दूर होते हुए भी पास नज़र आयेंगे

वफ़ा के रंग में डूबी हर शाम तेरे लिए ,
यह डगर, यह नगर,मेरा नाम बस तेरे लिए,
तू महेक्ति रहे चांदनी रातों की तरह,
इस नए साल का पैगाम तेरे लिए

Thursday, April 3, 2008

अली लोहान पर चढ़ा खूबसूरत दिखने का शौक

लंदन. लोहान की बहन पर चढ़ा खूबसूरत दिखने का शौक लिंडसे लोहान की छोटी बहन अली पर भी खूबसूरत दिखने की ललक सवार हुई है। खबर है कि उसने अपने होठों, बालों और आंखों की कास्मेटिक सर्जरी करवाई है।

वेबसाइट ‘द सन डॅाट को डॅाट यूके’ के अनुसार 14 वर्षीय अली एक रिएल्टी शो में काम करने जा रही हैं। यह शो लोकप्रिय होने के लिए उसके द्वारा की जा रही कोशिशों पर आधारित है।

शो के दौरान की तस्वीरों के आधार पर यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्होंने अपने होंठों की कास्मेटिक सर्जरी करवाई है।

इस शो में अली की मां भी उनके साथ होंगी। खबरों के अनुसार अली ने शायद अपने बालों और आंखों को भी संवारने की कोशिश की है। उनके बाल पहले से काफी अलग दिख रहे थे और अब वह कान्टेक्ट लैंस पहनती हैं।

Thursday, January 24, 2008

जानलेवा हो सकता है ज्यादा काम

लंदन.सावधान, जो भी लोग आज की प्रतियोगी दुनिया में खुद को साबित करने के लिए जरुरत मे ज्यादा काम कर रहे है। वे थोड़ी देर बैठकर यह लेख जरुर पढ़ लें।

हाल में हुए रिर्सच से यह बात साफ हो चुका है कि अधिक दबाव वाली नौकरी धातक स्ट्रेस की वजह बनती है जिसकी वजह से दिल की बिमारी हो सकती है।

इस स्टडी के में यह बात साफ हो गई कि जिन नौकरीयों में काम का दबाव ज्यादा होता है, उन लोगों को जानलोवा बिमारीयां बहुत जल्दी होती हैं।

Tuesday, January 15, 2008

15000 रुपए से भी कम के लैपटाप लांच

नई दिल्ली. एचसीएल इंफोसिस्टम्स ने 15000 रुपए से भी कम कीमत वाले लैपटाप लांच किए हैं। जिन पर मोबाइल इंटरनेट कंप्यूटिंग का लुत्फ लिया जा सकता है। एचसीएल पहले ही लीपटाप नाम से लैपटाप की एक रेंज बाजार में पेश कर चुकी है।

एंट्री लेवल के लैपटाप में कोई हार्ड ड्राइव नहीं है और यह लाइनक्स पर चलता है। अब माईलीप एक्स और वाई सीरीज में से वाई सीरीज पर माइक्रोसाफ्ट विस्टा चलाया जा सकता है। इंटेल के क्लासमेट की तरह दो नए माडल पेश किए जा रहे हैं। इनमें 7 इंच की स्क्रीन का वजन एक किग्रा से भी कम है। लेकिन एचसीएल ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं ताकि इसे छात्रों के अलावा अन्य लोगों के काम भी लाया जा सके।

क्लासमेट में जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वहीं एचसीएल के लैपटाप में इंटरनेट चलाया जा सकता है। क्लासमेट के मुकाबले एचसीएल के लैपटाप की कीमत काफी कम है। माईलीप उन लोगों के लिए बनाया गया है, जो आनलाइन रहना चाहते हैं। वजन कम होने के कारण यह कहीं भी ले जाया जा सकता है।

कीमतें :

माईलीप एक्स सीरीज की कीमतें 13,990 रुपए से शुरू होती है। हाईएंड माईलीप की कीमत 30,000 रुपए है।

वजन :

केवल 960 ग्राम है। इसमें इंटेल का अल्ट्रा मोबाइल प्लैटफार्म और माइक्रोसाफ्ट का विस्टा होम प्रीमियम आपरेटिंग सिस्टम भी लगा है।

Friday, January 11, 2008

सैकड़ों सेम्पल कर दिए नष्ट

इंदौर. i एमवाय अस्पताल में वर्षो से पड़े सैकड़ों विसरा सेम्पल गायब हो गए लेकिन कब और कहां? किसी को नहीं पता। लंबे समय से थानों के पुलिसकर्मियों द्वारा सेम्पल नहीं ले जाने से इन्हें नष्ट करने की बात सामने आई है। सेम्पल कब और किसके आदेश से नष्ट हुए हैं, इसकी जानकारी भी किसी के पास नहीं है।

विसरा जांच सालों चलती है जिसके चलते हजारों मामले अटके रहते हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 75 प्रतिशत मामलों में विसरा जांच हेतु राऊ भेजा जा रहा है। कारण है- मौत की वजह और बयान स्पष्ट होने के बाद भी कानूनी पक्ष मजबूत होना।

जहां तक मालवा की बात है सबसे ज्यादा जहर खाने, सांप काटने, जहर खुरानी के मामले होते हैं जिसके चलते इनकी विसरा जांच तो भेजी ही जाती है। लेकिन दूसरे मामलों में भी भेजी जाने लगी है।

सेम्पल पोस्टमार्टम कक्ष के पास व ग्राउंड फ्लोर स्थित आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में रखते हैं। कई माह तक संबंधित थानों के पुलिसकर्मी इन्हें नहीं ले जाते। कई बार संबंधित थानों को कहा भी गया। सूत्रों के मुताबिक इन्हें संभालने की दिक्कतों के कारण पुराने विसरा सेम्पलों को नष्ट कर दिया गया जिसके चलते अब केवल नए मामलों के ही विसरा सेम्पल हैं।

इसलिए नहीं ले जाते पुलिसकर्मी

रोज के 8-10 पोस्टमार्टम होने से प्रक्रिया में समय लगता है। विसरा की स्थिति में पुलिसकर्मियों को बाद में सेम्पल ले जाने को कहा जाता है। इसके चलते पुलिसकर्मियों को कुछ दिनों बाद थाने से अस्पताल आना पड़ता है। फिर वहां से सेम्पल लेकर राऊ स्थित क्षेत्रीय न्यायायिक विज्ञान प्रयोगशाला में जमा करना होता है।

प्रयोगशाला काफी ऊंचाई पर और पथरीला रास्ता है। इन दिक्कतों के कारण पुलिसकर्मी सेम्पल नहीं ले जाते। एक कारण यह भी है कि जांच रिपोर्ट डेढ़-दो वर्ष बाद आती है इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं लेते। कुछ पुलिसकर्मियों का मानना है कि विसरा ले जाने में अनहोनी हो जाती है। इसे लेकर वे ले जाने में हिचकते हैं।

हजारों जांचें और लोग सिर्फ 15

इन सभी जांचों के लिए लैब में अभी रसायन, भौतिकी और बायोलॉजी संबंधी तीन अलग-अलग सेक्शन हैं। हर वर्ष रसायन नारकोटिक्स, विजिलेंस ट्रैप के 350 व जहर संबंधी 2000 से ज्यादा केस आते हैं जिनमें सांप व जानवर के काटने के मामले भी हैं।

खून की 1500 से ज्यादा तथा सीरम के 500 सेम्पल जांच के लिए आते हैं लेकिन इसके लिए अमला सिर्फ 15 लोगों का है। इनमें सात अधिकारी (डॉक्टर्स, वैज्ञानिक) तथा बाकी टेक्नीशियन्स व कर्मचारी हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं विसरा केस

कोर्ट में आने वाली अड़चनों से बचने के लिए अधिकारी पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर्स को विसरा जांच भी करवाने का कहते हैं जिससे संख्या बढ़ रही है। हालत यह है कि अस्पताल और लैब में हजारों की तादाद में विसरा सेम्पल धूल खा रहे हैं।

इसी तरह खून के 3900 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें घटनास्थल पर मिला मृतक व आरोपियों का खून तथा हथियार पर लगे खून, बाल आदि की जांच आदि हैं।

कोर्ट की इस संपत्ति का अब क्या होगा?

नष्ट सेम्पलों की जांच पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की जाना थी। सेम्पल किसके व किस थाने से संबद्ध थे, अब पता लगाना मुश्किल है। इनकी जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से कोर्ट की कार्रवाई प्रभावित होगी। फोरेंसिंक विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. दादू के मुताबिक हम तो सेम्पल थाने के पुलिसकर्मी व अस्पताल स्थित पुलिस चौकी के सुपुर्द कर देते हैं।

-महीनों तक पुलिस सेम्पल नहीं ले जाती इसलिए इन्हें रखने की दिक्कत तो है ही, साथ ही दरुगध भी फैलती है। मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं मामले की जांच कराऊंगा'

सैक्स टेप: बदनामी से भी नाम कमाया

न्यूयॉर्क.

हॉलीवुड अभिनेत्रियां चर्चा में बने रहने के लिए हमेशा कुछ न कुछ करती रहती हैं। कभी किसी स्टार अभिनेता के साथ अफेयर तो कभी किसी फिल्म में आपत्तिजनक दृश्य देना। इन्हें पता है कि ऐसा करके ये आसानी से सुर्खियां बटोर सकती हैं। ऐसी ही कुछ अभिनेत्रियां हैं जिनके सेक्स टेप बहुत चर्चित हुए।

पेरिस हिल्टनपेरिस हिल्टन के पूर्व ब्वायफ्रेंड रिक सैलमन ने जब पेरिस का सेक्स वीडियो बेचने की घोषणा की थी तब कहा गया था कि पेरिस बहुत डर गई है। हालांकि बाद में यह अफवाह निकली। पेरिस को इस टेप से 6 लाख डॉलर मिले। पेरिस कहती है कि उसे इस टेप की बिक्री से कोई राशि नहीं मिली है लेकिन उसे अच्छी खासी चर्चा मिल गई है।

पामेला एंडरसन

बेवॉच गर्ल पामेला एंडरसन ने अपने सेक्स टेप की बिक्री के लिए पूर्व पति टॉमी ली के साथ काफी झगड़ा किया था लेकिन इसे इंटररेट पर रिलीज होने से रोक नहीं सकी। इसके बाद से ही वह अदालतों के चक्कर काट रही है। उसे डर है कि कहीं पूर्व ब्वायफ्रेंड ब्रेट माइकल्स के साथ वाला उसका टेप इंटरनेअ पर रिलीज न हो जाए।

लोरेन कोनार्डलोरेन कोनार्ड ने पहले तो अपना कोई सेक्स वीडियो होने से इंकार किया था लेकिन जब उसका वीडियो इंटरनेट पर आया तो इसके लिए उसने अपने पूर्व ब्वायफ्रेंड स्पैन्सर प्रैट, अपनी दोस्त हीदी मोंटेग पर यह आरोप लगाया कि वे उसे बदनाम करने के लिए ऐसा कह रहे हैं। इसके बाद कोनार्ड और हीदी की दोस्ती टूट गई। हालांकि बाद में स्पैन्सर ने आरोप लगाया कि यह सब कोनार्ड के नए प्रेमी ब्रॉडी जैनर का किया हुआ है।

केट मॉसकेट मॉस ने भले ही अपने प्रेमी पीट डोहर्टी के साथ संबंध तोड़ लिए हों लेकिन उसके सैक्स टेप ने उसे फिर से चर्चा में ला दिया है। मॉस कोशिश कर रही है कि पीट इसे न बेचे। यह तब शूट हुआ था जब ये दोनों न्यूयॉर्क के एक होटल में मस्ती कर रहे थे।

किम कारदाशियांकिम उस वक्त सुर्खियों में आई थी जब उसने मीडिया के सामने यह मान लिया था कि गायक रॉबर्ट जे के सैक्स वीडियो में उसके साथ दिखने वाली लड़की वही है। किम ने अपने इस वीडियो से 20 लाख डॉलर कमाए थे।

Thursday, December 27, 2007

10 मिनट में 40 हजार

दिल्ली.आपने कई प्रकार के जॉब के बारे में सुना होगा और काम के समय और मिलने वाले वेतन के बारे में भी बहुत कुछ जानते होगें लेकिन एक ऐसा जॉब भी है जहां पर साल भर में सिर्फ 60 घंटे काम, अनुमानत: एक दिन में 10मिनट काम होता हो और इस काम के एवज में महीने का पगार रु0 40 हजार मिलता हो । आप इस बात पर थोड़ा आश्चर्य करे और शायद आपने इसके बारे में अभी तक ज्यादा नहीं सुना होगा और यदि आप दिल्ली विधान सभा के सदस्य नही हैं तो ज्याद कुछ नही जानते होगें।

२क्क्७ में दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल केवल २क् दिनों तक ही चला जिसका काम रोज के हिसाब से 4 घंटे से भी कम आता है। इन चार घंटों के काम में ४क् मिनट तो सिर्फ चाय पीने के लिए होते हैं। इनका आपस में बहस वगैरह काम इसमें शामिल नही है।

क्या कहती है दिल्ली विधानसभा की वेबसाइटदिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर अगर आप देखें तो एम.एल.ए. के काम करने का पूरा विवरण आपको मिल जाएगा। पहले सेशन से १७ सितबर तक सांसदो ने कुल मिलाकर 16 दिन अर्थात 3456 मिनट सदन में कामकाज किया। यह काम 59 घंटों के लगभग होता है।

१८ सितबंर तक एमएलए के कार्यो का विवरण मौजूद नही है लेकिन उस दिन भी लगभग4 घंटे तक ही कामकाज हो सका था।

और इसके अनुसार तीन दिन तक चले सत्र में कुल 12 घंटे तक ही कामकाज हुए। कुल मिलाकर जोड़ा जाए तो इस हिसाब से केलेन्डर के अनुसार पूरे साल में सिर्फ 75 घंटे ही काम हुए हैं।17 सितबंर तक में कुल 623 मिनट इन्होंने चाय पीने और अलग-अलग वाद-विवादों में खर्च किए। 18 सितबंर तक चले तीन दिन के सत्र के दौरान इन्होंने १ घंटा 30 मिनट का समय खर्च किया। इस हिसाब से देखा जाए तो 2007 में पूरे कार्यकाल के दौरान सिर्फ 62 घंटो तक ही सही तरीके से कामकाज हो सका।

दिल्ली में पहले विधानसभा सत्र 1993 से 1998 तक 930 बैठके और पूरे पांच साल तक सही तरीके से कामकाज हुआ था। 1998 तक पूरे सत्र को मिलाकर कुल 106 दिन काम हुए थे। जो कि प्रत्येक साल में 20 से २५ दिन होता है।

Friday, December 21, 2007

सूर्य की रोशनी में दम, करे कैंसर के खतरे को कम

न्यूयार्क. सूर्य की रोशनी में दम, करे कैंसर के खतरे को कमपीछले कई साल से मैडिकल विशेषज्ञों की ऐसी मान्यता रही है की ज्यादा धूप लेने से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकीन अमरीका में हुए एक ताजा अध्ययन से पता चला है की सूर्य की रोशनी से लंग कैंसर के खतरे की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

अमरीका में शोधकर्ताओं की ओर से कीए गए इस अध्ययन में पता चला है की स्मोकिंग के बाद यदि कम मात्रा में धूप की रोशनी ली जाए तो लंग कैंसर का खतरा कम हो जाता है। इस अध्ययन में वल्र्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन और अमरीका के केंद्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों की भी मदद ली गई है।

पराबैंगनी किरणों करें कमाल
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डा. कर्डिक गारलैंड ने कहा की मीडियम-वेव अल्ट्रावॉयलैट किरणों का स्तर घटने से लंग कैंसर का खतरा बढ़ने की आशंका है। करीब सौ से भी ज्यादा देशों में अक्षांश, पराबैंगनी किरणों की स्थिति के आधार पर लंग कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या को देखते हुए निष्कर्ष निकाला गया है कि जो देश ऐसे स्थानों पर बसे हुए हैं जहां पराबैंगनी किरणों पर्याप्त मात्रा में पहुंचती हैं, वहां लंग कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या बहुत कम पाई गई। लंग कैंसर के 75 से 85 प्रतिशत तक केस ऐसे मिले हैं जिसका कारण धूम्रपान है।

इस अध्ययन में एअरबोर्न एरोसेल लैवल को भी लंग कैंसर की एक मुख्य वजह बताया गया है।

Wednesday, December 19, 2007

मोटापा बढ़ाता है कॉर्नफ्लेक्स

वॉशिंगटन. मोटापा बढ़ाता है कॉर्नफ्लेक्स  अब तक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता माने जाने वाले कॉर्नफ्लेक्स को भी अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मोटापा बढ़ाने वाला माना है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में न्यूट्रीशन के प्रोफेसर बैरी पॉपकिन का कहना है कि अगर रोजाना के नाश्ते में कॉर्नफ्लेक्स और सॉफ्ट ड्रिंक की मात्रा कम कर दी जाए तो साल भर में 10 पौंड तक वजन कम किया जा सकता है।

पॉपकिन और उनके सहयोगियों ने एक शोध के बाद पाया की कॉर्नफ्लेक्स में भी शकर और कैलोरीज की बहुत ज्यादा मात्रा होती है, इसलिए इनके सेवन से मोटापा बढ़ता है। यही बात कॉर्न सिरप पर भी लागू होती है, क्योंकि उसमें फ्रक्टोज की मात्रा अधिक होती है। कॉर्न सिरप का उपयोग सोडा और एनर्जी ड्रिंक में आमतौर पर किया जाता है।

प्रो. बैरी ने कहा की किशोर उम्र के बच्चों में सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन तो और भी नुकसानदेह है। अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों में इन दीनों सुबह के नाश्ते में दूध की जगह सॉफ्ट ड्रिंक का उपयोग होने लगा है।

प्रो. पॉपकिन ने यूएस न्यूज को बताया की मक्के की फसल से निकले पशुचारे को खाने से दुधारू पशुओं में चर्बी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे पशुओं का मांस खाने से इंसानों के शरीर में भी चर्बी पैदा करने वाले ओमेगा-3 एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो बाद में हृदय रोग का कारण भी बन सकता है।

मसूढ़ों के लिए भी नुकसानदेह मोटापा
लंदन: पचास से अधिक बीमारियों का कारण बना मोटापा आपके मसूढ़ों के लिए भी खतरनाक है। अधिक मोटापे के कारण शरीर मसूढ़ों में होने वाली बीमारी से कारगर तरीके से नहीं निपट सकता, जिससे दांत गिरने का खतरा पैदा हो जाता है।

बोस्टन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, मेसाचुसेट्स के वैज्ञानिकों ने चूहों पर कीए अध्ययन में इस बात का खुलासा किया है।

जीवन गढ़ने की तैयारी

वॉशिंगटन. cromosomeशोधकर्ता पूर्ण कृत्रिम डीएनए से जीवन के विविध प्रकारों को गढ़ने में एक बहुत बड़ी बाधा दूर करने की तैयारी में दिख रहे हैं। अमेरिका के मैरीलैंड स्थित वैज्ञानिकों ने पहला पूर्ण कृत्रिम गुणसूत्र बना लिया है। यह उन सभी निर्देशों से युक्त है, जो कि किसी जीवाणु के जीवित रहने और प्रजनन करने के लिए जरूरी हैं।

अमेरिकी वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे अगले साल इसका कोशिका में प्रत्यारोपण कर सकेंगे, जहां इसके स्वयं विकसित होने की उम्मीद है। यह ठीक उसी तरह होगा जैसे कि इंटरनेट से सॉफ्टवेयर डाउनलोड किए जाते हैं।

परखनली में बनाया था डीएनए:
इससे ठीक 50 साल पहले वैज्ञानिकों ने पहली बार परखनली में डीएनए बनाया था। इसके तहत उन्होंने साधारण रासायनिक घटक आपस में मिलाए थे।

Monday, December 17, 2007

ताउम्र ताजगी के सूत्र

तंदुरुस्ती हजार नियामत, सच है। जाहीर है, तभी सेहत बरकरार रखने के लिए लोग तमाम प्रयास करते रहते हैं। लेकिन, पते की बात यह है कि बिना किसी प्रयास और ताउम्र ताजगी के सूत्रखर्च के भी आप ताउम्र पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं। बस, बनाना हैं आपको कुछ नीयम..

ताजा फल-सब्जी खाएं
आपका शरीर चलता-फिरता, यानी जीवित है। तो तय है की उसके ठीक से चलते-फिरते रहने के लिए उसे भोजन भी जीवित, यानी बिल्कुल ताजा चाहिए। इसलिए ताजा और शाकाहारी, कच्ची और हल्की पकी चीजों के साथ जितना संभव हो ताजा फल खाएं। ये तत्व ही प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावशील और बेहतर तरीके से काम करने के लिए शक्ति देते हैं। हां, कैमिकल्स के प्रयोग से पैदा फल-सब्जी खाने से बचें।

इस तरह खाएं फल
आमतौर पर लोग फल भोजन के साथ ही खाते हैं। जबकि हक़ीक़त में फल अकेला ही खाना चाहिए, भोजन या किसी दूसरी चीज के साथ नहीं, फिट फॉर लाइफ बुक सीरीज के लेखक हार्वे डायमंड कहते हैं। कारण, किसी दूसरी चीज की बनिस्बत, फल तेजी से ऊर्जा में बदलता है। अकेला खाने पर फल पेट में क्षारीय रूप में पहुंचता है, जबकि दूसरी चीजों के साथ खाने पर एसिड के रूप में पहुंचता है। नतीजतन, ठीक से पचता नहीं और विषाक्त भी हो सकता है।

सलाद जरूर लें
सलाद एकदम जैविक चीज है। अनेक शोध और अध्ययन खुलासा करते हैं कि पौष्टिक तत्वों से भरपूर सलाद कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी के साथ अन्य तमाम रोगों से भी दूर रखता है।

मांसाहार कम से कम
एंटीबॉयोटिक्स और कृत्रिम हार्मोंस के साथ अधिक मात्रा में मांसाहार और पॉल्ट्री खाद्य-पदार्थ रोगों की खान हैं। हमारे लसिका-तंत्र (लिम्फ-सिस्टम) की रचना ऐसी नहीं है, जो इन्हें नियंत्रित कर सके या बाहर निकाल सके। इसलिए यह शरीर में बढ़ते रहते हैं और विषैला रसायन एकत्रित करते हैं। इससे धीरे-धीरे प्रतिरक्षा-तंत्र कमजोर हो जाता है।

डेयरी-उत्पाद भी घटाएं
डेयरी-उत्पाद बहुत से लोगों के लिए स्वास्थ्य का दुश्मन है। दरअसल इनमें फायदेमंद फाइबर और काबरेहाइड्रेट्स नहीं होता, बल्कि भरपूर फैट और कोलेस्टोरॉल पाया जाता है। डेयरी-उत्पाद अधिकतर एलर्जी, अपच, मोटापा, दिल की बीमारी, ओस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

पानी ख़ूब पिएं
दिन भर की भागदौड़, काम और वाष्पीकरण में रोजाना शरीर का क़रीब दो लीटर पानी खर्च हो जाता है, जिसकी पूर्ति करना जरूरी होता है। आपको रोजाना कम से कम आठ-दस गिलास पानी पीना ही चाहिए। पानी दिल की जलन, पीठ दर्द, सिर दर्द, पेट की ख़राबी, डायबिटीज, दिल की बीमारियों यहां तक कि कैंसर जैसे रोगों से बचाने के साथ उनके इलाज में भी मददगार होता है।

एक्सरसाइज आवश्यक
निस्संदेह रोजाना की नियमित एक्सरसाइज आपको न सिर्फ बीमारियों से बचाती है, बल्कि तन-मन में चुस्ती-फुर्ती और व्यक्तित्व में भी बदलाव लाती है।

सकारात्मक सोच रखें
आपका सोच और व्यवहार जीवन की महत्वपूर्ण बात है। जीवन में क्या सही-ग़लत हो रहा है, यह इन्हीं पर टिका होता है। जीवन को आधे भरे गिलास की तरह देखें, आधे खाली की तरह नहीं।

आंखों से खुलेंगे घर के ताले!

मेलबॉर्न. आंखें यूं तो बहुत कुछ कहती हैं और अपने जादू के जलवे भी दिखाती हैं लेकिन अब जल्दी ही आंखों की मदद से घर के ताले खोलना, बैंक एकाउंट आंखों से खुलेंगे घर के ताले!  से लेन-देन करना और अपने कंप्यूटर को चालू करना भी संभव हो सकेगा।

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता सामी फांग द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार ये करीश्मे आंख की पुतली (आइरिश) स्कैनिंग तकनीक से संभव हैं। कीसी पुतली की रूपरेखा उंगलियों की छाप की तरह अद्वितीय होती है तथा उम्रभर इसमें कोई बदलाव नहीं होता। ‘साइंस डेली’ ने यह जानकारी दी।

फिर भी है समस्या:
पुतली से पहचान की प्रणाली विभिन्न नागरीक कार्र्यो में इस्तेमाल होती है। इसे सटीक नहीं माना जाता क्योंकि रोशनी में बदलाव से आंख की पुतली के आकार तथा रूपरेखा में बदलाव आ जाता है।

तो समाधान है हाजीर:
इस समस्या से नीजात पाने के लीए फांग ने एक तकनीक विकसित की है ताकी पुतली की रूपरेखा पर आस-पास की रोशनी की दशा से होने वाले असर का आकलन हो सके। उनके मुताबिक, ‘रोशनी की दशा के अनुरूप पुतली के आकार में 0.8 मिलीमीटर से 8 मिलीमीटर तक परिवर्तन हो सकता है। करीब 1200 चित्र प्रति सेकेंड की दर से चित्र खींचने वाले हाई-स्पीड कैमरे के इस्तेमाल से पुतली की सतह की गतिविधियां पकड़ना संभव है’।

Saturday, December 15, 2007

पुर्नजन्म :थोड़ी हकीकत थोड़ा फसाना

क्या है यहरीइनकार्नेशन या पुनर्जन्म की अवस्था में व्यक्ति को लगता है कि वह पहले किसी समय, कि सी दूसरी जगह पर, दूसरे शरीर के रूप में कहीं रह चुका है। वह पहले किसी और रूप में जीवन जी चुका है, और अब नए रूप में इस जीवन में है। विशेषज्ञ इसे 'देजा वू' का नाम देते हैं। 'देजा वू' फ्रेंच भाषा का शब्द है,जिसका अर्थ है मस्तिष्क का एकाएक किसी विशेष स्थिति में पहुंच जाना।

डॉ. विज की स्टडीमियामी के प्रमुख मनोचिकित्सक डॉ. ब्रायन विज ने इस क्षेत्र में काफी काम किया है। 70 के दशक में डॉ. विज के पास लैब टेक्नीशियन महिला मनोरोग के इलाज के लिए आई। कैथरीन नाम की इस महिला को ठीक करने और उसके मन में छुपी बातों को बाहर निकालने के लिए विज ने सम्मोहन का सहारा लिया। इससे कैथरीन को शराबी पिता द्वारा यौन र्दुव्‍यहार, स्वीमिंग पूल में धक्का दिया जाना और डेंटिस्ट के क्लीनिक पर गैस मास्क लगाकर मारने की कोशिश के हादसे याद आए। लेकिन इसके बाद भी कैथरीन की समस्या ठीक नहीं हुई। ऐसे में विज ने उसे पूर्वजन्मों वाली जगहों के बारे में सोचने के लिए कहा। इससे कैथरीन करीब चार हजार वर्ष पूर्व के जीवन में चली गई। कैथरीन ने बताया कि उसकी मौत बाढ़ के पानी में डूबने से हुई थी।

आगे के सम्मोहन सत्रों में उसने 18 वीं सदी की स्पेन की वैश्या के रूप में और यूनान में बिताए दिनों का जिक्र किया। विज ने इसे फैंटसी माना, लेकिन इसके बाद कैथरीन के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार आया। दो जन्मों के बीच की ऐसी ही एक अवस्था में कैथरीन ने विज को उनके जीवन से जुड़ी ऐसी बातें बताईं जो सिर्फ वही जानते थे। कैथरीन के अनुसार आध्यात्मिक अवस्था में होने पर किसी गुरु ने उसे बताया कि वह 86 जन्म जी चुकी है। इसके बाद डॉ. विज के पास कैथरीन की बातों को मानने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया था।

पीठ का दर्द और पिछला जन्मएक दूसरे केस में डॉ. विज की हमपेशा पीठ में लंबे समय से दर्द की शिकायत लेकर आई। दर्द का कोई कारण नजर नहीं आने पर डॉ. विज उसे सम्मोहन से पूर्व जन्मों में ले गए। महिला ने बताया कि वह अपने पूरे परिवार के साथ सड़क किनारे बने मकानों में रहती थी। वहां से गुजर रही रोमन सेना के सेनापति ने उसकी पीठ में जोरदार ठोकर मारी, जिससे रीढ़ की हड्डी टूट गई। सम्मोहन का यह सत्र पूरा होने के बाद महिला पूरी तरह ठीक हो गई।

क्या रहा नतीजाडॉ. विज इसे 'पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरैपी'(पीएलआरटी) कहते हैं। उन्होंने अंधविश्वासी होने के ठप्पे से बचते हुए अपने अनुभवों को प्रकाशित किया। उनकी किताब 'मैनी लाइव्ज, मैनी मास्टर्स' छपने पर कई लोगों ने उन्हें अपने अनुभव बताए। लोगों ने बताया कि वे खुद भी कई बार इस तरह के अनुभवों से दो-चार हो चुके हैं। डॉ. विज कई बच्चों को भी इसी थेरैपी से ठीक कर चुके हैं।

सेहत खराब करता है प्यार

लंदनब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना है की प्रेम में नाकामी के कारण शरीर में होने वाली कई प्रतिक्रियाओं से सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने कहा है की रोमांस के दौरान अच्छे और बुरे अनुभवों के कारण हथेलियों पर पसीना आने, धड़कन की रफ्तार बढ़ने और आंखों पर बुरा असर पड़ने जैसे लक्षण देखे गए हैं। इसके अलावा एड्रेनैलिन नामक हार्मोन भी तेजी से अलग होता है जो स्वास्थ्य के लीएचिनताजनक है। काफी

इंपीरिल कॉलेज के प्रोफेसर मार्टिन कोई ने कहा कार्य के दौरान तनाव और अस्वस्थता के पीछे इसी तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं। लोग कई बार शिकायत करते हैं की लंबे समय से उनमें फ्लू जैसे लक्षण हैं लेकिन वे सभी इसी तनाव का परिणाम होते हैं। मार्टिन ने यह भी कहा कि भावनाओं के हमारी सेहत पर असर के बारे में जानकारी न होने के कारण भी स्वास्थ्य खराब होता है।

मार्टिन के मुताबीक अगर कोई भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहा है तो उसे इसके असर के बारे में भी चौकस रहना चाहिए। माना जाता है कि जब आप अपने इमोशन के बारे में करते हैं तो खुद को कुछ कमजोर महसूस करते हैं लेकिन इसका कारण यही है कि भावनाओं और सेहत के बीच संबंध है। यह तो जाहीर ही है की शादी के तुरंत बाद अपनी पत्नी को खो देने वाले पुरुषों में हृदय संबंधी गंभीर रोग होने की आशंका 50 प्रतिशत ज्यादा रहती है।

2050: रोबोट से प्यार और सैक्स

एम्सटर्डम. मनुष्य इसी सदी के मध्य तक रोबोट से प्यार करेंगे और शादी भी। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के शोधकर्ता की भविष्यवाणी है कि मैसाचुसेट्स ऐसी पहली जगह होगी, जो इन शादियों को वैध करार देगी।

robot loveनीदरलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ मैस्ट्रिक्ट के शोधकर्ता डेविड लेवी ने इस भविष्यवाणी के साथ ही हाल में मनुष्य और रोबोट के बीच रिश्तों को लेकर अपनी पीएचडी पूरी की है। इसमें उन्होंने शादी के साथ जुड़े विशेषाधिकारों और परंपराओं को भी शामिल किया है।

हालांकि लेवी कहते हैं कि रोबोट के साथ सैक्स की बातें कुछ अजीब जरूर लगती हैं, लेकिन एक बार कोई कॉसमॉस जैसी मैग्जीन में ऐसी कोई स्टोरी पढ़ लेगा तो इसे आजमाने से नहीं चूकेगा।

अपनी कृतियों से प्यार करता रहा है आदमी
मानव और उसकी कलाकृतियों या यांत्रिक कृतियों के बीच रोमांस के किस्से काफी समय पुराने हैं। इसी में एक ग्रीक मिथक भी शामिल है जिसमें एक वास्तुकार पिग्मेलियन अपने बनाई आबनूस की प्रतिमा के प्यार में पड़ गया था, जिसका उसने नाम रखा था गैलाशिया। मिथक बताता है कि देवी वीनस ने इसमें जीवन संचार किया था। लेवी का कहना है कि यह बात आज भी सच है। 40 साल पहले वैज्ञानिकों ने पाया था कि छात्र एलाइजा नाम के एक कंप्यूटर प्रोग्राम के प्रति काफी लगाव रखने लगे थे। यह प्रोग्राम स्टूडेंट्स से सवाल पूछता था और एक साइकोथिरेपिस्ट की तरह बोलता था।

robot girlलेवी कहते हैं कि रोबोट्स आदमी जैसे होने लगे हैं और वे अब मनुष्यों के काफी संपर्क में आने लगे हैं। पहले रोबोट्स का इस्तेमाल केवल फैक्टरियों में होता था, जब उनसे वाहनों को तैयार करने जैसे काम लिए जाते थे। इसके बाद उनसे मेल भेजने, लोगों को म्यूजियम्स दिखाने, घरों में वेक्यूम क्लीनर्स का काम लेने आदि के काम लिए जाने लगे। अब हमारे पास सोनी के आयबो जैसे रोबोट कुत्ते या टिकल मी एल्मोस और टैमागोचिस जैसे डिजिटल पैट मौजूद हैं।

अपनी थीसिस इंटिमेट रिलेशनशिप्स विद आर्टिफिशियल पार्टनर्स में लेवी ने कहा है कि रोबोट इतने आदमी जैसे दिखने वाले, व्यक्तित्व वाले और फंक्शन करने वाले हो जाएंगे कि मनुष्य उनसे प्रेम करने लगेगा, उनके साथ सैक्स करेगा और उनसे शादी भी करेगा। लेवी कहते हैं कि रोबोट्स से प्रेम और सैक्स की बातें पूरी तरह होकर रहेंगी।

क्यों करेगा आदमी रोबोट से प्यार
लेवी का कहना है कि साइकोलॉजिस्ट्स ने प्यार जैसी भावना के पीछे करीब एक दर्जन कारण गिनाए हैं और इनमें से तकरीबन हरेक मनुष्य के रोबोट से रिश्ते पर एप्लाई किया जा सकता है। मिसाल के लिए प्रेम में पड़ने के पीछे एक बड़ा कारण है व्यक्तित्व में समानता और ज्ञान और इसे प्रोग्राम किया जा सकता है। दूसरा कारण है कि मनुष्य सोचता है कि दूसरा व्यक्ति उसे पसंद करता है और इसे भी प्रोग्राम किया जा सकता है।

यूरोपियन रोबोटिक्स रिसर्च नैटवर्क के संस्थापक हैनरिक क्रिस्टेनसेन ने 2006 में भविष्यवाणी की थी कि पांच साल में मनुष्य रोबोट्स के साथ अपने सैक्स संबंध बना लेंगे। लेवी का कहना है कि कई कंपनी सैक्स डॉल्स पहले से ही बेच रही हैं और बस अब उनमें स्पंदन डालने के लिए कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल करना भर बाकी है।

लेवी कहते हैं कि सॉफ्टवेयर ज्यादा से ज्यादा एडवांस होता जा रहा है और मनुष्य का रोबोट से रिश्ता ज्यादा पर्सनल। 100 साल पहले विजातीय विवाह प्रतिबंधित थे। 50 साल पहले उन पर से रोक हट चुकी है। समलिंगियों में विवाह भी काफी हद तक मंजूर किए जा चुके हैं। शादी के लिए अब एक ट्रैंड बन गया है कि हर पार्टनर अपने चुनाव को जोरदार ढंग से रखने लगा है।

कहां और कब होगा यह संभव
लेवी कहते हैं कि मैसाचुसेट्स पहली जगह होगी जहां मानव के रोबोट्स के साथ शादियों को मान्यता दी जाएगी। इसकी वजह यह है कि मैसाचुसेट्स यूनाइटेड स्टेट्स के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा उदारवादी है और समलिंगियों के मामले में भी वह चैंपियन रहा है। इसके अलावा वहां एमआईटी में ज्यादा हाईटैक रिसर्च भी चल रही हैं।

हालांकि ज्यॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी अटलांटा में रोबोटिसिस्ट रोनाल्ड आरकिन का मानना है कि उन्हें नहीं लगता कि 2050 के आसपास रोबोटों के साथ शादी को कोई वैधानिक आधार मिलेगा। वह कहते हैं कि कुछ भी हो सकता है और वैधानिक आधार न मिलने का मतलब यह नही कि लोग इस विकल्प को ट्राई नहीं करेंगे। लेवी कहते हैं कि रोबोट से शादी के अपने फायदे तो हैं ही।

नैतिक सवाल
इस भविष्यवाणी के साथ ही ढेरों सवाल भी खड़े हो गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि रोबोट्स के साथ सैक्स जैसी चीजें अपराधों को जन्म देगा। कोई नहीं जानता कि रोबोट्स के साथ रिश्ते बनाने वाले असल में लोगों के साथ क्या करेंगे। आरकिन कहते हैं कि अभी इस मुद्दे पर और शोध की जानी बाकी है। लेवी जरूर कहते हैं कि रोबोट को रखने का मतलब होगा कि वैश्यावृत्ति कम हो जाएगी।

आरकिन सवाल उठाते हैं कि अगर हम रोबोट्स को अपने रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाएंगे और उनसे रिश्ते भी रखेंगे तो यह देखना जरूरी है कि हमारे सामाजिक तानेबाने का क्या होगा। किस तरह वे मानवता और सभ्यता पर असर डालेंगे। लेवी फिलहाल रोबोट्स के नैतिक इस्तेमाल पर एक पेपर लिख रहे हैं।

Friday, December 14, 2007

फर्क कैसा ?

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में पैदाइशी तौर पर ही सेंस ऑफ जस्टिस होता है। तभी तो वह अपनेपन को समझ पाते हैं। धीरे-धीरे यही उन्हें अपनों और परायों में फर्क करना parentingसिखाता है। पैरेंट्स को चाहिए कि बच्चों को बड़ों के साथ ही अपने हमउम्र की भी इज्जत करना सिखाएं।

आपको क्या करना है:
* अगर बच्चों के साथ इज्जत से पेश आएं, तो वह भी अपने सेंस ऑफ जस्टिस का पूरा उपयोग करते हुए स्थितियों के बारे में काफी साफ नजरिया रखते हैं। बच्चों को सिखाएं कि जो लोग लोगों जैसे हैं उन्हें उसी हिसाब से पसंद करें। वह अपने दोस्तों या करीबियों को सिर्फ यह देखकर न पहचानें कि वह क्या कर सकता है और क्या नहीं। बच्चे टाइप कास्ट में बंटे नहीं रहते जैसे-शर्मीले, जिद्दी या फिर किसी और तरह के। यह आप ही हैं, जो उन्हें इस केटेगरी में डालते हैं या फिर वैसा माहौल बनाते हैं।

बच्चे की स्प्रिट हमेशा ऊंची रखें, लेकिन उसमें सुपीरियर फीलिंग ना आने दें। यह कुछ ऐसा कहने से आती है, जैसे आप उससे अच्छे हैं, आप ज्यादा अच्छा जानते हैं या फिर फलाना बच्च खराब है वगैरह। अपने डर को बच्चों के सामने मत आने दीजिए। आप ही डरेंगे तो बच्चों का क्या होगा। बच्चे पर असर
* बच्चे के बाल मन पर डांटने, मारने या डराने का असर तो होता है, लेकिन उतना नहीं जितना लोगों के सामने बेइज्जत होने का होता है।
* आप अपने बच्चे के साथ ही किसी दूसरे के बच्चे पर भी ऐसा माहौल न बनने दें। उसे ‘बैड बॉय’ या ‘बैड गर्ल’ की संज्ञा न दें।
* बच्चे में छोटी-छोटी चीजों जैसे खेल में पहले बारी न मिलने जैसी चाजों का भी असर पड़ता है। यह आपके लिए नहीं, लेकिन उनके लिए एक बड़ी बात हो सकती है। छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा असर अपने पैरेंट्स और मीडिया का पड़ता है, इसलिए आपको खुद पर भी कंट्रोल रखना है और मीडिया की एप्रोच तक भी।

अब Hindi का जवाना है

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