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Sunday, December 9, 2007

मैं तुलसी तेरे आंगन की

अधीकांश भारतीय घरों में तुलसी का पौधा देखने को जरूर मील जाएगा। कारण इसका धार्मिक महत्व तो है ही, लेकिन इसका स्वास्थ्यवर्धक महत्व भी कम नहीं है। धार्मिक tulsiमहत्व यह है कि पुराणों में इसे विष्णु प्रिया नाम से विभूषित कीया गया है तो हिनदू पूजा पद्धति इसके बगैर अधूरी मानी गई है।

स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो सर्वप्रथम तुलसी के पौधे को छू कर जब हवा घर के भीतर प्रवेश करती है तो वह एंटीसेप्टिक और बीमारी रोधी गुणों से परिपूर्ण होती है। यानी घर से कीटाणुओं को भगा हवा को शुद्ध करती है। यही वजह है की 500 ई.पू. के प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी तुलसी के औषधीय गुणों का उल्लेख मिलता है। संस्कृत भाषा में संभवत: तभी तुलसी का अर्थ होता है ‘अतुलनीय।’

औषधीय गुणों वाली तुलसी
* बुखार कम करती है।
* अल्सर से बचाती है।
* ब्लड शुगर के खतरनाक माने जाने वाले स्तर को कम करती है।
* लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार लाती है।
* मुंह की दरुगध दूर करती है।
* कीड़े-मकोड़े दूर भगाती है।
* एलर्जी और जलन में राहत देती है।
* मन-मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डाल तनाव से जूझने में मददगार होती है।
* खाली पेट गर्म या ठंडे पानी के साथ तुलसी जूस का सेवन न सिर्फ पाचन तंत्र को मजबूत करता है, बल्की
* किडनी में अगर स्टोन है तो शहद के साथ तुलसी का सत पीने से आराम मीलाता है।
* तुलसी और अदरक का जूस पेट दर्द समेत पेट के कीड़ों को मारने में भी प्रभावी है।
* सर्दी-जुकाम में भी शहद के साथ एक चम्मच तुलसी जूस लेने से राहत मीलती है।
* गुड़ के साथ तुलसी की पत्ती चबाने से पीलीया भी ठीक हो जाता है।
दिमाग की ताकत को भी बढ़ाता है।

कैसे फैलता है एचआईवी ?

Most people get HIV by having unprotected sex with some one who already has HIV.चार मुख्य तरल पदार्थ हैं जीनके कारण एचआईवी फैलता है। रक्त और सीमन में मौजूद थोड़ी सी भी मात्रा किसी व्यक्ति में एचआईवी फैलाने में सक्षम है।

एचआईवी फैलने के तीन प्रमुख कारण

१ जब एक व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ सैक्सुअल संबध रखता हो तो एचआईवी का सक्रंमण हो सकता है।

२ रक्त में यह वाइरस सांद्रित अवस्था में रहता है इसलिए रक्त की जरा सी भी मात्रा जिसमें एवआईवी हो,किसी व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए काफी है ।

३ स्वस्थ और बिना कटी फटी त्वचा एचआईवी को शरीर में प्रवेश नहीं करने देती और यह एचआईवी को रोकने में एक महत्वपूर्ण बाधक के रूप में काम करती है। प्रभावित रक्त Needle-stick injuries can transfer HIVकी एक बूंद भी अगर किसी व्यक्ति के शरीर में चली जाए तो वह इस घातक संक्रमण की चपेट में आ जाएगा । अन्य द्रवों में इसकी मात्रा ज्यादा हो तभी वह शरीर में फैलता है ।

एचआईवी एक सक्रंमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में निम्ललिखित कारणों से फैल सकता है

* रक्त (मासिक धर्म के रक्त सहित)* सीमन (वीर्य)* योनि स्त्राव* ब्रेस्ट मिल्क

ये चार मुख्य तरल पदार्थ हैं जीनके कारण एचआईवी फैलता है। रक्त और सीमन में मौजूद थोड़ी सी भी मात्रा किसी व्यक्ति में एचआईवी फैलाने में सक्षम है। बच्चों में ब्रेस्ट मिल्क के सेवन से एचआईवी के फैलने की संभावना बहुत अधिक होती है क्योंकि उनका प्रतिरक्षा तंत्र बन रहा होता है। वहीं वयस्कों में ब्रेस्ट

मिल्क से एचआईवी सक्रंमण फैलने की संभावना कम होती है ।

इनसे एड्स नहीं फैलता

स्लीवाआंसूपसीनाविष्ठा , मलमूत्र

ये वे तरल पदार्थ है जिनके कारण एड्स नहीं फैलता है। पसीने में एचआईवी वाइरस नहीं होता है। अभी तक ऐसा कोई मामला रजिस्टर्ड नहीं हुआ है जिससे यह पता चलता हो कि इन तरल पदार्थों के कारण मनुष्य में एड्स फैलता हो।

एड्स के सक्रंमण को शरीर पर होने से कैसे रोका जाए

* सुरक्षात्मक सेक्स संबंध * कंडोम का उपयोग * साथी से वफादारी * सूई का सही इस्तेमाल, साझेदारी से बचें* सेक्स संबधांे से दूर रहकर

जीनके कारण एचआईवी फैलता है* असुरक्षित सेक्स संबंध* रक्त का सीधी जुड़ाव , सक्रंमित इंजेक्शन के द्वारा , रक्त चढ़ाने के दौरान मां से बच्चे में जन्म से पूर्व संक्रमण या फिर ब्रेस्ट मिल्क के सेवन के कारण।

बस पांच मीनत

सेहत. सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, सो एक बार फिर शुरू हो जाए वर्जिश। पर इस बार कुछ ऐसा करें की आलस न छाए और रोज़ाना कसरत की आदत बनी रहे। बस पांच मिनट कैसे..

हम हर बार सर्दियों में जोर-शोर से वर्जिश शुरू करते हैं, पर सर्दियां खत्म होने से पहले ही अधिकांश लोग पुराने र्ढे पर लौट आते हैं। बार-बार नए संकल्प के साथ कसरत शुरू करने और फिर कुछ दीनों बाद आलस पर वापस आ जाने की प्रव्र्त्तीकी शुरुआती उत्साह बहुत जल्दी काफूर हो जाता है? ये हैं कुछ ऐसे ज़रूरी कदम, जो कसरत समेत तमाम लक्ष्यों को हमारी आदत में शामिल करते हैं। से हर कोई लड़ चुका है। ऐसा क्यों होता है

* लक्ष्य हो सरल : कभी भी कठीन लक्ष्य न बनाएं। सलमान की तरह भुजाएं हासिल करने या रोज दो घंटे जिम में पसीना बहाने के संकल्प से बेहतर है कि आप सिर्फ पांच मिनट की वर्जिश से शुरू करें। आप यह आसानी से कर सकते हैं। आप महीने भर तक केवल पांच मिनट ही मेहनत करें और अगले महीने से उसे दस मिनट करें। इस तरह रोजाना की कसरत आपकी आदत में शामील होगी। पहले आसान से प्रारंभ करें, फिर उसे आदत बनाएं और तब व़क्त बढ़ाएं।

* तय करें : केवल यह कहना ही काफी नहीं है कि मैं कसरत करूंगा या सैर के लिए जाऊंगा। इसकी बजाय कितने समय तक वर्जिश करनी है, कब करनी है और कहां करनी है, ये सब कुछ तय होना चाहीए।

* याद रखें : आप नहाने से पहले दांतों पर ब्रश अवश्य करते हैं। इसी तरह कुछ ऐसा तय करें की उसके पहले एक्सरसाइज़ करना कभी न भूल पाएं। लंच से पहले, ब्रेकफास्ट के पहले या नहाने से पहले, यह ‘ट्रिगर’ कुछ भी हो सकता है।

* माप सकें : आप निश्चित तौर पर बता सकें कि आज आपने अपने रोजाना के लक्ष्य को कहां तक पूरा किया। 10 मिनट की दौड़, आधा मील की सैर, पांच पुशअप्स के तीन सेट ऐसी संख्याएं हैं, जीन्हें बताया जा सकता है।

* लक्ष्य हो एक: एक महीने के लिए मात्र एक लक्ष्य पर दृष्टि रखें। हो सकता है कि आप महीना पूरा होने से पहले ही समय 20 मिनट तक बढ़ाना चाहें। पर इस उत्साह को आगे के लिए बचा कर रखें, क्योंकि एकाग्रता और धैर्य की असल परीक्षा तो अभी बाकी है।

* हिसाब रखें : रोजाना का हिसाब रखें, ताकि आपको पता लगता रहे कि कहां पहुंच रहे हैं। हीसाब-कीताब में जटिलता न रखें, सिर्फ तारीख, समय और आपने क्या कीया, यही लीखें।

* दूसरों को बताएं : यह काफी महत्वपूर्ण है। अपने जीवनसाथी, मित्र या सहकर्मी, कीसी को भी दैनिक रिपोर्ट दे सकते हैं, हां यह ध्यान रखें कि उसे आपके लक्ष्य की जानकारी हो। वह आपसे रिपोर्ट की अपेक्षा रखे और आपके भूल जाने पर ख़ुद ही पूछ ले।

* प्रेरित हों : हर कीसी को प्रेरणा और प्रोत्साहन की ज़रूरत होती है। यदि लगातार दो दिनों तक वर्जिश न कर पाएं, तो स्वयं से पूछें कि ऐसा क्यों हुआ। समय-समय पर ख़ुद को प्रोत्साहित करते रहें। दूसरों से तारीफ मिले तो और भी बढ़िया है। परिवार और मित्रों का दबाव भी होना चाहिए, ताकि आप लक्ष्य को भूल न पाएं। जिस दिन आलस छाए या छुट्टी मार लेना आसान लगे, यह लेख एक बार और पढ़ें। यह सब तब तक जारी रखें, जब तक की कसरत आदत में न शामील हो जाए।

एड्स का इलाज!

जोधपुर. मारवाड़ में उगने वाली डेजर्ट एलोविरा (मीठा ग्वारपाठा) और मशरूम (खुम्बी) अब एड्स रोगियों के लिए फायदेमंद साबित होने लगी हैं। मानव कल्याण एलोविरा और मशरूम से एड्स का इलाज!संस्थान के निदेशक और सेवानिवृत्त चिकित्सा अधीकारीदिया है। डॉ.गंगासिंह चौहान ने काजरी के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ.ए.पी.जैन के सहयोग से एलोविरा और मशरूम के कैप्सूल तैयार किए हैं। एड्स रोगियों पर इनका परीक्षण करने पर अभूतपूर्व और चौंकाने वाले सुधार नजर आए। सफलता से उत्साहित डॉ.चौहान ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस रिसर्च का दायरा बढ़ाते हुए एड्स रोगियों पर बड़े स्तर पर कैप्सूल से इलाज करना शुरू कर

क्या हुआ फायदा : कैप्सूल से रोगियों के प्रमुख बायोलॉजिकल पैरामीटर्स न केवल थम गए, बल्कि उनका वजन भी बढ़ने लगा। सीडी टी कोशिका गणक में 61 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। 90 प्रतिशत रोगियों की सीडी कोशिका में बढ़ोतरी के साथ शारीरिक वजन में भी 9 से 10 किलो (प्रतिशत) बढ़ोतरी देखी गई। इसी तरह उनमें प्रथर ऐडेप्टोजन का खात्मा होना भी सामने आया।

फायदा दिखा, शोध जारी : राठौड़
डॉ.चौहान ने एड्स रोगियों पर किए इस शोध के बारे में हाल ही में डेजर्ट मेडिसिन रिसर्च सेंटर में पत्रवाचन किया। उन्होंने बताया कि एलोविरा और मशरूम के मिश्रण से तैयार इस कैप्सूल से एड्स रोगियों में काफी सुधार आया। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ने लगी। अभी इस पर रिसर्च जारी है। इसलिए रोगियों को मेडिसिन के साथ कैप्सूल दे रहे हैं।

गुणों की खान : जैन
डॉ.जैन ने बताया कि एलोविरा और मशरूम में आठ आवश्यक एमीनो एसिड, दस से बारह वसीय अम्ल और सभी आवश्यक विटामिन होते हैं। आधुनिक विज्ञान ने इनमें से कुल 200 तत्व खोज नीकाले हैं, जो न केवल पोषक, बल्कि रोगोपचार में सहायक हैं। इसके प्रयोग से एड्स रोगियों में प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ती है। उनके रोग प्रतिरक्षात्मक सुरक्षा घेरा भी मजबूत होता है। महीने भर तक इन कैप्सूलों को लेने पर तीन-चार सौ रुपए खर्चा आता है। इसकाकोई साइड इफेक्ट भी अभी तक नजर नहीं आया है।

पहले चूर्ण, फिर कैप्सूल
पहले एलोविरा और मशरूम को मिलाकर एक चूर्ण तैयार कीया गया। सादड़ी में एड्स रोगियों का इलाज करने वाली मानव कल्याण संस्थान ने कुछ एड्स रोगियों को यह चूर्ण दिया तो उनकी हालत में सुधार नजर आया। बाद में चूर्ण से कैप्सूल तैयार कीए गए।

घर का हकीम नीम

घर का वैद्य करार दीए गए नीम में औषधीय गुणों की भरमार है इसीलीये अब इसकी पत्तीयों का इस्तेमाल विभिन्न उत्पादों में कीया जाने लगा है। घर पर भी इसके प्रयोग से घर का हकीम नीमकाफी कुछ हासिल कीया जा सकता है।

वृक्षों में नीम ही एक ऐसा वृक्ष है जिसकी पत्ती से लेकर जड़ तक का औषधीय महत्व है। इसीलिए इसे प्राचीन समय से घर का वैद्य कहा जाता था। यही वजह है कि नीम अब सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई दवाओं, क्रीम, टूथ पेस्ट, शैम्पू तथा कीटाणुनाशकों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। नीम न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि प्रकृति को प्रदूषण से भी बचाता है।

नीम के गुण * नीम प्राकृतिक रूप से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

* इसका कड़वा स्वाद पित्त और कफ दोष में संतुलन बनाए रखता है।

* नीम की कोंपल खाने से खून साफ होता है। साथ ही यह लीवर तथा त्वचा के विषैले तत्वों को भी दूर करता है।

* सूखी खांसी होने पर नीम की पत्ती की चाय शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से राहत मीलती है।

* नीम की छाल को लौंग के साथ पीसकर उसे पेस्ट की तरह इस्तेमाल करें तो यह दांतों को कीड़े से बचाता है तथा मसूड़ों को मजबूत बनाता है। इससे सांसों में ताजगी भी बनी रहती है।

* त्वचा संबंधी समस्या होने पर नीम का तेल लगाने तथा नीम के पानी से स्नान करने से बीमारी से निजात पाई जा सकती है।

* नीम नाखून तथा बाल को भी स्वस्थ बनाता है। यह एंटीसेप्टिक भी है।

* ठंड के मौसम में नीम का पेस्ट बनाकर सीर में लगाएं तथा एक घंटे बाद धो लें। इससे रूसी का नामोनिशान मीट जाएगा तथा बाल भी नहीं झड़ेंगे।

न्यूट्रॉन बीम बताएगी पता

फ्लोरेंस (इटली). लियोनार्डो डा विंसी के खोए हुए मास्टरपीस का पता लगाने के लिए अब न्यूट्रॉन बीम्स (न्यूट्रॉन की किरणों) का इस्तेमाल किया जा रहा है। फ्लोरेंस के पैलाजो वेचियो की दीवार के पीछे इस कृति के होने की संभावना जताई जा रही है।

battle of anghiariआर्ट डायग्नोस्टीशियन मॉरीजियो सेरासिनी ने इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए 30 साल तक इंतजार किया है। सेरासिनी की टीम नवंबर में पैलाजो की 177 फीट लंबी दीवार का निरीक्षण करेगी और डा विंसी की कृति बैटल ऑफ अंघियारी की तलाश करेगी। 1.5 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस खोज अभियान को यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के सैन डियेगो सेंटर ऑफ इंटरडिसिप्लिनेरी साइंस फॉर आर्ट, आर्कीटेक्चर एंड आर्कियोलॉजी की ओर से चलाया जा रहा है।

1977 में आर्ट एंड आर्कीटैक्चरल डायग्नोस्टिक सेंटर एडीटैक की स्थापना के बाद सेरासिनी ने अब तक इंजीनियरिंग, आर्ट हिस्टरी और मेडिसिन की मदद से 2000 इमारतों और कलाकृतियों का अध्ययन किया है। सेरासिनी अपने आर्काइव के काम के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, इन्फ्रारेड, थर्मोग्राफी और अल्ट्रावॉयलेट डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं। एडीटैक की ओर से अब तक बॉटीसेली के एलेगरी ऑफ स्प्रिंग में थ्री ग्रेसेज और लियोनार्डो डा विंसी के एडोरेशन ऑफ द मैगी नाम की कलाकृतियों को खोजने में मदद की है। इसके बाद आई डॉन ब्राउन की किताब द डा विंसी कोड में उन्हें अकेले वास्तविक चरित्र का दर्जा मील सका।

क्या है न्यूट्रॉन्स बीम्स तकनीक
serraciniन्यूट्रॉन्स के जरिए कलाकृतियों की सार-संभाल का काम नया नहीं है। मॉरीजियो सेरासिनी का कहना है की न्यूट्रॉन एक्टिवेशन एनालीसिस नाम की इस तकनीक में न्यूट्रॉन्स की किरणों को छोड़ा जाता है, जो किसी चीज पर पड़ते ही उसके रसायनिक तत्वों से मीलती हैं और गामा कीरणों को तैयार करती हैं। इन किरणों को एक डिटेक्टर पकड़ लेता है। सेरासिनी के मुताबिक इसमें सबसे मुश्कील चीज हैं उपकरण जिनका इस्तेमाल इस तरह करना होता है की आप न्यूट्रॉन बीम्स को छोड़ने के बाद मील रहे निष्कर्षो का विश्लेषण ठीक से कर सकें। इसमें कई-कई हफ्ते भी लग सकते हैं और डाटा भी काफी धीरे-धीरे ही हासील हो पाता है।

सेरासिनी का कहना है कि हमें यह पता है की लियोनार्डो ने अपनी पेंटिंग्स में किन रसायनों का इस्तेमाल किया था इसलीये इनका पता लगाना आसान है। इसके बाद इस कृति की नकली इमेज मील सकती है, जीसमें यह भी पता चल जाएगा कि वह कहां है और कीतनी बड़ी है।

न्यूयार्क.मुंबई में जन्मी और वर्तमान में न्यूयार्क में रहने वाली पेंटर सियोना बैंजामिन 23 नवंबर को न्यूयार्क में आयोजित होने वाली ग्रुप एग्जीबिशन में अपनी कलाकृतियों के साथ शामिल होंगी। न्यूयार्क के प्रतिष्ठित आर्ट इंस्टीच्यूशन ने इस कला प्रदर्शनी के लीये 11 कलाकारों को आमंत्रित किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को ज्यादा यादगार बनाने के लिए ही इन दिनों वे अपनी कलाकृतियों को फिनिशिंग टच देने में व्यस्त हैं।

सियोना का कहना है कि वे पेंटिंग की पारंपरिक स्टाइल को ज्यादा पसंद करती हैं। उन्होंने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से ग्रैजुएशन कीया है।

सियोना कहती हैं‍ उनकी हमेशा से ही ख्वाहिश थी कि वे लाइट बॉक्स क्रिएट करें, क्योंकी वे मुंबई में रही हैं और वहां फिल्मों का बड़ा क्रेज है। वे जब भी फिल्म देखने जाती थीं तो लाइट बॉक्स में फिल्मों के पोस्टर देखती थीं। ये पोस्टर उन्हें बहुत प्रभावित करते थे। फिल्मों के प्रति अपने शौक को उन्होंने मिक्स मीडीयाकीया गया है। नामक क्रिएशन में भी उतारा है। इसे उनके कॉलेज में भी प्रदर्शित

उनकी प्रदर्शनी ‘पैंटोमाइम इन परदेस’ डिसप्ले बॉक्स में टीवी स्टिल की तरह दिखाई देंगी। सीयोना बड़े दार्शनिक अंदाज में कहती हैं की उनके काम में उनके जीवन का प्रभाव साफ देखा जा सकता है। वे रोजमर्रा की घटनाओं तथा आस-पास की चीजों से अपनी कला के लिए प्रेरणा लेती हैं।

अब Hindi का जवाना है

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