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Monday, December 17, 2007

आंखों से खुलेंगे घर के ताले!

मेलबॉर्न. आंखें यूं तो बहुत कुछ कहती हैं और अपने जादू के जलवे भी दिखाती हैं लेकिन अब जल्दी ही आंखों की मदद से घर के ताले खोलना, बैंक एकाउंट आंखों से खुलेंगे घर के ताले!  से लेन-देन करना और अपने कंप्यूटर को चालू करना भी संभव हो सकेगा।

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता सामी फांग द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार ये करीश्मे आंख की पुतली (आइरिश) स्कैनिंग तकनीक से संभव हैं। कीसी पुतली की रूपरेखा उंगलियों की छाप की तरह अद्वितीय होती है तथा उम्रभर इसमें कोई बदलाव नहीं होता। ‘साइंस डेली’ ने यह जानकारी दी।

फिर भी है समस्या:
पुतली से पहचान की प्रणाली विभिन्न नागरीक कार्र्यो में इस्तेमाल होती है। इसे सटीक नहीं माना जाता क्योंकि रोशनी में बदलाव से आंख की पुतली के आकार तथा रूपरेखा में बदलाव आ जाता है।

तो समाधान है हाजीर:
इस समस्या से नीजात पाने के लीए फांग ने एक तकनीक विकसित की है ताकी पुतली की रूपरेखा पर आस-पास की रोशनी की दशा से होने वाले असर का आकलन हो सके। उनके मुताबिक, ‘रोशनी की दशा के अनुरूप पुतली के आकार में 0.8 मिलीमीटर से 8 मिलीमीटर तक परिवर्तन हो सकता है। करीब 1200 चित्र प्रति सेकेंड की दर से चित्र खींचने वाले हाई-स्पीड कैमरे के इस्तेमाल से पुतली की सतह की गतिविधियां पकड़ना संभव है’।

जीत हो या हार, मोदीत्व तो रहेगा

दृष्टिकोण. गुजरात विधानसभा चुनाव का केंद्रबिंदु रहे मोदीत्व के तीन पहलू हैं। पहला, अवसर को भुनाने का नरेंद्र मोदी का सामथ्र्य, दूसरा, विकास के बारे उनका जीत हो या हार, मोदीत्व तो रहेगानजरिया और तीसरा, उनकी अधीरता। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौत के सौदागर की टिप्पणी को भुनाने में उन्होंने जरा भी देर नहीं की। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में तो उन्हें सोहराबुद्दीन और अफजल गुरु तक मुद्दे उठाने में भी कोई संकोच नहीं हुआ। मोदी ये मुद्दे वैसे भी उठाते। यह अलग बात है कि सोनिया की टिप्पणी ने उन्हें ये मुद्दे प्लेट में परोसकर दे दिए। मोदी ने वाइब्रंट गुजरात को जिस आक्रामक अंदाज में पेश किया वह कोई दूसरा नहीं कर सकता था। उन्होंने खुद को दिल्ली में बैठे तीन दिग्गजों-मनमोहन सिंह, पी चिंदबरम और मोंटेकसिंह अहलूवालिया से भी बड़े आर्थिक सुधारवादी के रूप में पेश किया। असंतुष्टों को नजरअंदाज करना और समर्थकों को साथ लेकर चलना भी मोदी की एक बड़ी खूबी है। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि गुजरात विधानसभा के हाल में संपन्न चुनाव में मोदी और मोदीत्व ही सर्वप्रमुख मुद्दा था।

ब्यूटी tips बीपाशा के

एशिया की सबसे सेक्सी महीला करार दी गईं बीपाशा को सांवले रंग और कजरारे नैनों ने हर दील अजीज बना रखा है। ‘बिप्स’ की आंखों में गजब की सेक्स अपील है। जो ब्यूटी टिप्स बिपाशा केबातें लोग शब्दों से बयां नहीं कर पाते, वह वे आंखों से ही बोल जाती हैं।

बीपाशा का कहना है की वे आई मेकअप के बीना घर से नहीं निकलतीं। थोड़ा मेकअप ही उनकी आंखों के लिए काफी है। वे आंखों के मेकअप के लिए हाईलाइटर, काजल तथा मस्कारा लगाती हैं। उन्हें लिपस्टिक पसंद नहीं, इसलिए वह लिप ग्लॉस लगाती हैं। साथ ही वह फाउंडेशन के बजाय सन स्क्रीन वाले मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करती हैं।

कयोंकी त्वचा भी सांस लेती है..
* हमेशा अच्छी क्वालिटी के मेकअप प्रोडक्ट इस्तेमाल करें। इस मौसम में त्वचा की नमी को बचाए रखने के लिए अच्छी कंपनी का मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करें।

* रात में सोते समय मेकअप उतारकर सोएं, क्योंकि त्वचा भी सांस लेती है।

* नॉर्मल और ड्राई स्किन वाले लोग आधा कप ठंडे दूध में पांच बूंद ऑलिव ऑयल मिलाएं तथा इस मिश्रण को रुई से चेहरे पर दिन में दो बार लगाएं। इससे त्वचा मुलायम होती है।

* ऑयली स्किन वाले लोग पानी तथा लेमन जूस बराबर मात्रा में मिलाएं तथा रोजाना करीब 10 मिनट तक त्वचा पर लगाकर धो दें। इससे मुंहासों के दाग मिट जाएंगे।

* मिश्रित त्वचा वाले एक चौथाई चम्मच लेमन जूस, एक चम्मच ठंडा दूध तथा एक चम्मच खीरे का रस मिलाकर त्वचा पर लगाएं।

* सोने से पहले आंखों के चारों ओर बादाम के तेल से हल्के हाथों से मालीश करें।

* अच्छी कंपनी के शैंपू तथा हेयर कंडीशनर से बालों को धोएं, लेकिन महीने में एक बार डीप कंडीशनिंग करना न भूलें। कंडीशनर आप घर में भी तैयार कर सकते हैं। एक चम्मच विनेगर, एक चम्मच ग्लिसरीन तथा एक अंडे को मिला लें और इससे सिर की त्वचा की मालिश करें। गर्म पानी में तौलिए को भिगोकर इससे बालों को 20 मिनट के लिए ढंक लें। इसके बाद बाल धोएं। बालों में सप्ताह में एक बार ऑलिव ऑयल, नारियल या बादाम का तेल लगाएं।

* सीरफ चेहरे की त्वचा पर ही ध्यान न दें, बल्की शरीर के अन्य हीस्सों की त्वचा को भी स्क्रबर से साफ करें। समय-समय पर मेनीक्योर तथा पेडीक्योर करवाते रहें।

Sunday, December 16, 2007

बदले की फिराक में सलीना

कोरियोग्राफर से फीलम निर्देशक बने गणोश आचार्य की फिल्म ‘मनी है तो हनी है’ में काम कर रहीं सलीनाबदले की फिराक में सेलिनामॉरीशस में शूटिंग के दौरान सहकलाकारों गोविंदा और आफताब शिवदासानी ने उन्हें काफी तंग कीया जीससे वे काफी परेशान हो गईं। अब सेलिना ने भी इन्हें परेशान करने की ठान ली है। सेलिना ने मजाकिया लहजे में कहा कि अब परेशान करने की उनकी बारी है और सामने वाली पार्टी को भी उनसे सजग रहना होगा। जेटली हाल ही में इसकी शूटिंग निपटाकर मॉरीशस से लौटी हैं।

सेलिना ने बताया कि वे मॉरीशस में ‘मनी है तो हनी है’ की शूटिंग के लिए गई थीं। इस फिल्म में उनके साथ गोविंदा और आफताब शिवदासानी भी हैं। इन दोनों ने पूरे शूटिंग शेड्यूल में मुझे काफी परेशान किया। हर दिन वह मेरे साथ प्रैन्क करते थे। आखिर में तो ऐसा हो गया था कि मैं इन लोगों से काफी सजग रहने लगी थी की पता नहीं अब ये मेरे साथ क्या नई शरारत कर दें। मुझे लग रहा था कि जल्द से जल्द शूटिंग खत्म हो और मुझे घर जाने का मौका मिले। अब शूटिंग पूरी हुई है और अब मैंने इन दोनों से बदला लेने की ठान ली है। मैंने इन सितारों से कह दिया है कि उनका समय खत्म हुआ और अब मेरी बारी है। जिस तरह उन्होंने मुझे परेशान किया, उसी तरह मैं उन्हें परेशान करूंगी।

सलीना मुस्कराते हुए कहती हैं कि मेरी चुनौती के बाद शायद गोवींदा और आफताब अब यही सोचते होंगे की मैं कब और कैसे उनके साथ प्रैन्क करने वाली हूं।

वेलकम टू बर्लीन

बर्लीन के बारे में सोचीए तो सबसे पहले दीमाग में बर्लिन की मशहूर दीवार ही आती है। हालांकी 1989 में दीवार गिरने के बाद लोग सोचने लगे की यहां देखने के लिए बचा Zoological gardenही क्या है। लेकिन जनाब आप गलत हैं क्योंकि आर्ट और साइंस के कद्रदानों के लिए अब भी यहां काफी कुछ है।

गेट, सेट, गो..
यहां की शॉपिंग को दो तरह से बांटा जा सकता है, पहली विंटेज शॉपिंग और दूसरी आधुनिक। यह बात अलग है कि यहां के लोगों ने विंटेज शॉपिंग को भी एक नया अंदाज दिया है। दूसरी खासियत है यहां का क्लॉथ मार्केट, जहां किलो के भाव से कपड़े मिलते हैं। कुछ लोग बर्लिन दीवार का टुकड़ा बेचने की गुजारिश भी कर सकते हैं, लेकिन आप इस झांसे में न आएं। यहां शॉपिंग टैक्स फ्री है।

brandenburg gateब्रेंडरबर्ग गेट
बर्लिन का यह सबसे मशहूर पर्यटन स्थल 1789-91 के बीच बना है। यह बर्लिन की गिर चुकी दीवार के पास ही है। इसका अद्भुत आर्किटेक्चर और विक्ट्री कॉलम देखने लायक है।

चैरलॉटनबर्ग पैलेस
ये खूबसूरत महल और इसका फ्रेंच गार्डन आपको 16वीं शताब्दी की याद दिला सकता है। इसका इंटीरियर ऑयल पेंटिंग्स से किया गया है। बात करें फ्रें च गार्डन की तो यह है तो बहुत बड़ा, लेकिन इसके कुछ हिस्से को अब फ्रेंच स्टाइल में मेंटेन किया जा रहा है।

एलेक्जेंडर प्लेट्ज
यह सबसे मशहूर चौराहा दूसरे विश्व युद्ध में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। यह 368मी. ऊंचा है, यहां वर्ल्ड टाइम क्लॉक भी है। यहां स्थित टेलीकैफे अपनी ही धुरी पर हर घंटे में घूमता रहता है।

ग्रीन लंग्स ऑफ बर्लिन
टायरगार्टन सेंट्रल पार्क या ग्रीन ओएसिस पार्क यहां की चंद प्राकृतिक खूबसूरत जगहों में से एक है। गर्मी के मौसम में तो यहां संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जूलॉजिकल गार्डन और जू रेलवे स्टेशन की गिनती भी शानदार जगहों में की जाती है।

आसमान पर दुनीया

हांगकांग सबसे ऊंचा और खूबसूरत हांगकांग के स्काइलाइन को कई कारणों से दुनिया का सबसे ऊंचा और खूबसूरत माना जाता है। एक बहुत बड़े एरिया में 43 स्काइलाइंन का एक समूह बनाया गया है, जहां हर इमारत की ऊंचाई 200 मीटर है। इसमें से 4 दुनिया की 15 सबसे ऊंची इमारतों में शामिल हैं। ये इमारतें रात के समय अपनी चकाचौंध से मनमोहक नजारा पेश करती हैं। व्यक्ति के जरूरत की हर सुविधा का इस स्काइलाइन में खास ध्यान रखा गया है।

मलेशिया 25 बड़ी इमारतों में से एक कुआलालंपुर का स्काइलाइन विश्व की 25 सबसे बड़ी इमारतों में से एक है। इस टॉवर की ऊंचाई 420 मी. है।

अमेरिका, यूरोप और एशिया के आइकॉन बने स्काइलाइन अब हर मेट्रो सिटी की जरूरत बन गए हैं। बढ़ती आबादी, सिकुड़ती दुनिया और ट्रैफिक के बढ़ते दबाव ने हर किसी को अपने आशियाने और कार्यस्थल के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया है।

यह आज के दौर की ऐसी समस्या है जो आने वाले वर्षो में और विकराल हो सकती है। इससे निजात दिलाने के लिए विश्व के कई बड़े शहरों में स्काइलाइन तैयार किए गए हैं।

स्काइलाइन यानी आवास, ऑफिस, बिजनेस सेंटर, शॉपिंग और सुख-सुविधाओं की जरूरतों की एक ही स्थान पर उपलब्धता।

स्काइलाइन शहर के सबसे खूबसूरत इलाकों जैसे- समुद्र के किनारों या पहाड़ी इलाकों में बनाए जाते हैं। इमारत के अंदर घर सहित एक आम व्यक्ति की जरूरत की सारी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इनमें स्कूल, अस्पताल, पार्क, स्वीमिंग पूल, नाइट क्लब और शॉपिंग मॉल जैसी सारी जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। कुछ स्काइलाइन में तो लोगों को ऑफिस जाने के लिए इमारत की छत पर हेलीपैड की भी सुविधा होती है ताकि ऑफिस पहुंचने में इमारत की ऊंचाई और शहर की व्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था बाधक न बने।

स्काइलाइन की ऊंचाई एयरट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है। ज्यादातर स्काइलाइन 200 मीटर तक ऊंचे हैं, लेकिन दुबई में 2009 तक बनकर तैयार होने वाले स्काइलाइन की ऊंचाई 705 से 950 मीटर तक होगी। गगन छूती बिल्डिंगों के समूह स्काइलाइन में आमतौर पर 7 से लेकर 47 इमारतें होती हैं। इसमें सभी इमारतों की ऊंचाई एक सी नहीं होती। स्काइलाइन के समूह में से कुछ में सिर्फ शॉपिंग मॉल होते हैं तो कुछ में सिर्फ ऑफिस, इसलिए लोगों की सुविधा के लिए कई स्काइलाइन आपस में जुड़े होते हैं। विश्व के प्रमुख स्काइलाइन पर नजर..

दुबई में बनेगा सबसे बड़ा स्काइलाइन रेगिस्तान के बीचोंबीच बसे दुबई में आधुनिक वास्तुशास्त्र के उत्कृष्ट नमूने देखने को मिलते हैं। यहां विश्व के ऊंचे होटल तथा घर तो पहले से ही थे, लेकिन आने वाले वर्षो में यहां का स्काइलाइन शायद विश्व का सबसे बड़ा होगा।

2010 तक भारत भी होगा शामिल आने वाले दो-तीन वर्षो में भारत भी स्काइलाइन की सूची में शामिल हो सकता है। मुंबई के कोस्टल एरिया में भी स्काइस्क्रैपर बनाए जा रहे हैं यह 2010 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इनकी ऊंचाई 301 मीटर होगी तथा इसमें 60 मंजिलें होंगी।

‘जासूस वायरस’ से बचें

पानीपत. दुनिया में प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा कंप्यूटर वायरस ग्रस्त होते हैं। हजारों की संख्या में कंप्यूटर रोज हैक कर दिए जाते हैं। ऐसे कंप्यूटरों की संख्या भी नए साल में ‘जासूस वायरस’ से बचेंसैकड़ों में है जीनसे बहुमूल्य डाटा सदा के लीए गायब हो जाता है। नए साल में ये समस्याएं और बढ़ने वाली हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ साइबर दुनिया के विलेन हैकर भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं।

अगर आप सतर्क नहीं रहे तो आपको बड़ी चपत लग सकती है। कंप्यूटर विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने बताया कि एक एंटीवायरस कंपनी के सर्वे में ये बात सामने आई है कि सिर्फ 29 प्रतिशत लोग ही अपने कंप्यूटर को लेटेस्ट सुरक्षा कवच से लैस मानते हैं। हैकर अब स्पाइवेयर और की-लागर्स जैसे ‘जासूस वायरस’ का इस्तेमाल करते हैं। जब आप नेट पर काम कर रहे होते हैं तो ये चुपचाप आकर आपके पर्सनल कंप्यूटर में बैठ जाते हैं।

स्पाइवेयर जहां आपकी फाइलों से महत्वपूर्ण जानकारियां इक्ट्ठी करके एक गुप्त फाइल बनाता जाता है, वहीं की-लागर्स आपके द्वारा टाइप किए जा रहे पासवर्ड को उसके मूल शब्द में रूपांतरित कर देता है। इसी तरह जब कभी आप दोबारा नेट पर लॉग ऑन करते हैं तो ये दोनों सॉफ्टवेयर चुपचाप एक्टिव हो जाते हैं और आपके द्वारा तैयार फाइल आपकी जानकारी के बिना ही अपने आका को मेल कर देते हैं। इन जानकारियों में आपका निजी कोड, इनटरनेट बैकिंग पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड सूचना आदि जो भी आपके कंप्यूटर में मौजूद हैं वे सब हो सकती हैं।

फायरवाल बड़ी सुरक्षा : नए आपरेटिंग सिस्टम में आजकल फायरवाल का विकल्प उपलब्ध है। यह आपके कंप्यूटर को बाहरी हमलों से बचाकर रखता है। इसके अलावा एंटीस्पाइवेयर और एंटीवायरस सॉफ्टवेयर से भी आपको अपना सिस्टम लैस रखना चाहिए।

जानकारी ही बचाव
इनटरनेट से डाउनलोड करने वाली फाइल का एक्सटेंसन अवश्य जांचें। किसी फाइल के अन्तीम तीन अक्षर उसका एक्सटेंशन तय करते हैं। जैसे मायफाइल.डॉक में अंतिम तीन अक्षर बताते हैं कि यह फाइल डाक्यूमेंट टाइप की है। इसी तरह अगर फाइल के अंत में .ईएक्सई हो तो यह फाइल संदेहास्पद होगी। ऐसी फाइल बहुत कम साइज की होती है। इससे सावधान रहें। कई बार हैकर छदम एक्सटेंशन का भी इस्तेमाल करते हैं जैसे मायफाइल.डॉक.ईएक्सई । इसमें भी अंतिम तीन शब्द ईएक्सई ही फाइल का एक्सटेंशन है इसलिए सावधान रहें।

अब Hindi का जवाना है

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