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Monday, January 7, 2008

नारीयल की चटनी

नवरात्रि के दौरान उपवास किया जाता है और सूर्यास्त के बाद एक बार ही भोजन किया जाता है, इसलिए नवरात्रि रेसिपीज कुछ अलग हटकर होती हैं। इनका शाकाहारी होना एक आवश्यक शर्त है। इनमें प्याज और लहसुन का प्रयोग वर्जित है। इन दिनों बनने वाले व्यंजनों में कुछ खास सामग्रियांे और सब्जियों का प्रयोग होता है। जैसे जैसे क्षेत्र बदलता है वैसे वैसे पकवानों में भी विविधता दिखने लगती है। मसालों में सिर्फ लाल मिर्च, हल्दी और जीरा का उपयोग होता है। सारे पकवानों में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस दौरान दूध, दही, बादाम और फलों के सेवन की स्वतंत्रता रहती भास्कर डॉट कॉम की ओर से नवरात्रि के मौके पर स्वादिष्ट व्यंजनों की कुछ विधियां प्रस्तुत की जा रही हैं.. coconut chatni................

आवश्यक सामग्री
3 हरी मिर्च2 छोटा चम्मच कटा हुआ धनिया
1 नींबू का रस निचोड़ा हुआ
1/2 चम्मच चीनी
1/2 जीरा दाना
स्वाद के मुताबिक नमक

विधि
नारियल, मिर्ची और धनिया को एक साथ क्रश कर लें।
उसमें आधा जीरा दाना,चीनी,नमक और नींबू का रस मिला लें।
जहां तक संभव हो कम से कम पानी का उपयोग कर मिक्सी में सबको मिला लें।
प्याली में इसे बिखेरकर रख दें।
एक छोटे पैन में इसे नर्म करने के लिए तेल गर्म कर लें।
अब बचे हुए जीरे दाने को इसमें मिला लें और इसे उबलते रहने दें।
इसे चटनी के ऊपर उड़ेल लें।
अगर आपकी इच्छा हो तो इसे कटे हुए धनिए से सजा लें।
नारियल की चटनी को पराठा, खिचड़ी, पकोड़े आदि के साथ परोसा जा सकता है।

नवरात्रि पकवान: केले का कोफ्ता

चूंकि नवरात्रि के दौरान उपवास किया जाता है और सूर्यास्त के बाद एक बार ही भोजन किया जाता है, इसलिए नवरात्रि रेसिपीज कुछ अलग हटकर होती हैं। इनका शाकाहारी होना एक आवश्यक शर्त है। इनमें प्याज और लहसुन का प्रयोग वर्जित है। इन दिनों बनने वाले व्यंजनों में कुछ खास सामग्रियांे और सब्जियों का प्रयोग होता है। जैसे जैसे क्षेत्र बदलता है वैसे वैसे पकवानों में भी विविधता दिखने लगती है।

मसालों में सिर्फ लाल मिर्च, हल्दी और जीरा का उपयोग होता है। सारे पकवानों में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस दौरान दूध, दही, बादाम और फलों के सेवन की स्वतंत्रता रहती है..

1. केले का कोफ्ता
kela kofta
................
आवश्यक सामग्री

कोफ्ते के लिए
10 ग्राम अदरक और हरी कटी हुई मिर्च
2 ग्राम जीरा
6 कच्चे केले
1 ग्राम हींग
5 ग्राम गरम मसाला पाउडर
नमक

ग्रेवी के लिए
2 ग्राम जीरा
250 ग्राम मिला हुआ दही
3 ग्राम लौंग
4 तेजपत्ता
1 ग्राम हींग
5 ग्राम कटा हुआ अदरक और हरी मिर्च
25 मिलीलीटर तेल
1.5 ग्राम हल्दी
50 मिलीलीटर पानी
5 ग्राम गरम मसाला पाउडर
2 ग्राम लाल मिर्च पाउडर

सजावट के लिए
3 ग्राम रंग रोगन
5 ग्राम कटा हुआ धनिया

विधि
सर्वप्रथम कच्चे केले को उबालकर उसे अच्छी तरह से मसल लें।
मसले केले में बची हुई आवश्यक सामग्रियों को मिलाकर, उसका बॉल बनाकर, उसे गहरे तल लें।
ग्रेवी के लिए तेल गर्म कर लें। उसमें लौंग, जीरा, हींग, तेजपत्ता, हल्दी, हरी मिर्च, मिला हुआ दही, गरम मसाला पाउडर, लाल चिली पाउडर, हल्दी और इन सब के अनुपात में पानी डालें।
इन सबको चटनी के रूप में बना लें।
अंत में इसमें कोफ्ता मिला लें। सर्व करने से चंद मिनट पहले इसे धीरे धीरे खौलाना ना भूलें।
रोगन और कटा हुए धनिया पत्ता से डिश को सजा डालें।

ओह! हा! हा ! बर्थ डे पार्टी

लगता है वे दिन बीत गए। बर्थ डे पार्टी में बहुत ही निकट के जिन्हें आप क्लोज फ्रंेड्स कह सकते हैं, उनके बगो और बर्थडे बॉय या गर्ल के पांच-छह फेंड्र्स ही बुलाए जाते थे। मम्मी लोग बगाों को पार्टी में भेजने से पहले कई समझाइश देकर भेजती थीं।

इधर-उधर भागना नहीं, आंटी प्लेट में जो भी खाने को दें, थैंक्यू बोलना। सबसे ज्यादा जरूरी निर्देश तो यह होता था कि कपड़ों पर कुछ भी नहीं गिराना। एक तो यह बैड मैनर्स है। सब लोग देखेंगे तो बोलेंगे कि तुम्हें मम्मी ने ठीक से खाना भी नहीं सिखाया और दूसरी तुम्हारी पार्टी ड्रेस खराब हो जाएगी। ऐसी ड्रेसेस भी ज्यादा नहीं होती थी।

मतलब यह कि बर्थ डे पार्टी में जाना भी एक डिसिप्लंड प्रोग्राम होता था। बहुत सारे कायदे-कानूनों का पालन करना होता था। बर्थडे गेम्स भी शालीनता से खेली जाती थी। अब क्या ऐसी बर्थ-डे पार्टी होती हैं? एक पार्टी की दृश्यावली हॉरर थीम पर थी। बगो काले कपड़े पहने, हड्डियां लटकाए, कहीं गालों पर डरावनी मूंछे और दाढ़ी पेंट किए हुए हा-हू-हू की आवाजें निकाल रहे थे।

घर की दीवारों पर डरावना चित्र लगे हुए थे। हड्डियां भी (बोंस) भी लटकी थी। बर्थ डे केक में एक विच (डायन) बनी हुई थी। जिसे काटकर खुशी में बगाों ने बहुत भयानक आवाजें निकालीं, चीखें मारीं। एक और बर्थ डे पार्टी रेड इंडियन थीम पर था। बगाों के चेहरे लाल, नीले, हरे रंगों के पेंटेड थे। वे ऊपर भी कुछ नहीं पहने थे। नीचे कुछ ने पत्तों की और कुछ ने अलग-अलग रंगों की पहियों वाली ड्रेस बनवाई गई थी।

सिर पर तरह-तरह के बैंडस लगे थे जिन पर पंख लगे थे। किसी तेज म्यूजिक पर बच्चों ने रेड इंडियन डांस किया। जो बहुत सारी चीखों , चिल्लाहटों से भरा था। शोर शराबे का यह आलम था कि पता ही नहीं चल रहा था कि यह पार्टी है या कोई रेड इंडियन गांव। शायद वहां भी कायदे की ही आवाजें होती होंगी। कुछ समय बाद एक-दो प्लेटे गिरीं-फूट गईं।

कोक और पेप्सी के गिलास भी कार्पेट पर लूड़के। केक काटने के बाद छीना झपटी का जबरदस्त माहौल बना। किसी को उसका पिंक फ्लॉवर और किसी को ग्रीन लील चाहिए था। पार्टी के बाद र्टिन गिफ्ट लेने की भी जबरदस्त उतावली थी। थैंक यू पता नहीं कहां गया। गिफ्ट लेने की होड़ थी। क्या हम इस पर मुंह फुलाएं, नाराज हों, नहीं-नहीं। क्या खुश हों- यह भी नहीं-नहीं, बस इतना करें कि कुछ शालीनता, शिष्टता के साथ और अच्छी थीम के साथ भी बर्थ डे मनाएं।

छुट्टियों में भी काम

बॉलीवुड.bips अदाकारा बिपाशा बसु ने बांग्ला प्रेम और काम के प्रति अपनी लगनशीलता का परिचय देते हुए एक मिसाल कायम कर दी है। उन्होंने अपनी बंगाली फिल्म की शूटिंग को पूरा करने के लिए अपनी सालाना छुट्टियां कुर्बान कर देने का फैसला किया है। ज्ञात हो कि रितुपर्णो घोष द्वारा निदेशित यह फिल्म सब चोरित्र काल्पोनिक बिपाशा की पहली बंगाली मूवी है।

उनके इस कदम पर श्री घोष फूले नहीं समा रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अभी तक हम बिपाशा की प्रतिभा को पूरी तरह परखने में कामयाब नहीं हुए हैं और उनसे बहुत कुछ दर्शकों को मिलना अभी शेष है।

विदित हो कि इस फिल्म में बिपाशा के साथ श्री घोष के चहेते प्रसेनजीत मुख्य भूमिका में हैं। श्री घोष ने बताया कि चूंकि उनका पूरा ध्यान नंदीग्राम की घटना पर केंद्रित था, इसलिए वे किसी भी अन्य प्रोजेक्ट के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे। ये बंगाली प्रोजेक्ट इसलिए आकार ले पाया क्योंकि इसकी स्क्रिप्ट मेरे पास काफी दिनों से तैयार बनी पड़ी थी और मं बिपाशा के साथ काम करने का इच्छुक भी था।

बिपाशा ने भी प्रोजेक्ट को देखते ही हामी भर दी थी। इस फिल्म में उनका रोल एक बंगाली एनआरआई की है। ऐसा कहा जा रहा है कि चूंकि बिपाशा की बंगाली भाषा कमजोर है पर एनआरआई की भूमिका में वे पूरी तरह फिट बैठती हैं। उनके संवादों में अंग्रेजी और बांग्ला भाषा का मिला जुला प्रयोग किया गया है।

पुरानी यादों को ताजा करते हुए रितुपर्णो घोष ने बताया कि बिपाशा को खोजकर दर्शकों के सामने लाने में उनका बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने बताया कि जब अपर्णा सेन की मैग्जिन के लिए सौंदर्य प्रतियोगिता चल रही थी तो वे ही उस समय जज थे। यही वह पहली प्रतियोगिता थी जब बिपाशा ने रैम्प पर अपने जलवे बिखेरे थे।

Sunday, January 6, 2008

सरकारें बदलेंगे मंगल और शनी

ग्रह योग. planets वर्ष 2008 में पड़ने वाले विक्रमीय संवत्सर के योगों में शनि व मंगल का वक्री होना असंतोष व राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देगा। युद्ध, उन्माद या आतंकवाद से जनजीवन प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह योग वित्त की हानि व पशुधन में कष्ट पहुंचाने वाला भी है।

ज्योतिष के संवत्सरफल-दिग्दर्शक ग्रंथों में नारद मुनि कृत ‘मयूरचित्रम्’ बहुत विश्वसनीय माना जाता है। इसमें बारहों महीनों में वर्षा, कृषि, बाजार, परस्पर संबंध, लोकजीवन, युद्ध-आतंक, राजनीतिक उथल-पुथल पर योगों के अनुसार विचार किया गया है। इस ग्रंथ के मतों के अनुसार पौष माह की अमावस्या को मूल नक्षत्र होने से घास की कीमतें सामान्य रहेंगी और फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा तिथि बढ़ने से जनता के सुखों में वृद्धि होगी।

इस वर्ष शनि के वक्री काल में अमेरिका का वर्चस्व घटेगा। पौष की पूर्णिमा को रविवार होने से विश्व में तनाव व आतंकवाद बढ़ सकता है और कहीं युद्ध भी हो सकता है। शुक्ल पक्ष में वृद्धि तिथि की अपेक्षा क्षय तिथियों की अधिकता होने से पूरे वर्ष का समय सरकार व जनता के लिए कष्टकारक रहेगा। शनि व राहु दोनों के सिंह राशि में होने से सरकारों को राजनीतिक भय रहेगा।

वर्ष कुंडली में सूर्य से मंगल ग्रह आगे चल रहा है, जो वर्षा में विलंब या कमी को दर्शाने वाला है। देश के कतिपय भागों में गत मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष में बारिश हुई है जो आषाढ़ मास में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से वष्र की संभावना को दर्शाता है। एक अन्य योग जो वर्षा की कमी को बताता है वह यह कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ है और उस दिन रविवार भी है, जो अन्न की कमी को बता रहा है।

ज्येष्ठ के दोनों पक्षों में प्रतिपदा को बुधवार है जो जनता को भय और बीमारियां देने वाला है। ऐसे में प्रत्येक जातक को अपनी-अपनी राशि के अनुसार पूजा-पाठ, शिव तथा चक्रधारी विष्णु की आराधना करना श्रेयस्कर होगा। पौष की अमावस्या को शनिवार होने से बाद के समय में अनाज के भावों में उछाल आने की संभावना है।

घर के दरवाजे से ही आते हैं सुख-दु:ख

वास्तु-विज्ञान.door घर का मुख्य द्वार सभी सुखों को देने वाला होता है। यह भवन का मुख्यांग होने के कारण एक प्रकार से मुखिया है। वास्तुपद रचना के अनुसार यदि द्वार की स्थिति सही हो तो कई दोषों का स्वत: ही निवारण हो जाता है और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य व यश-कीर्ति में वृद्धि होती है।

वास्तुशास्त्रों में द्वार की रचना पर बहुत जोर दिया गया है। द्वार को जितना सुंदर और मजबूत बनाने पर जोर है, उससे कहीं अधिक बल इस बात पर है कि यह वास्तुपद सम्मत हो। भवन की जो लंबाई चौड़ाई हो, उसे वास्तु पदानुसार आठ-आठ रेखाएं डालकर 64 पदों में बांट दें और दिशानुसार वहां द्वार रखें। यह नियम मुख्य भवन सहित चारदीवारी के प्रधान द्वार के लिए भी लागू होता है।

‘समरांगण सूत्रधार’ और ‘अपराजितपृच्छा’ में द्वार निवेश के बारे में विस्तार से बताया गया है। मयमतं, वास्तुप्रदीप, राजवल्लभ वास्तुशास्त्र, वास्तुमंजरी में भी यही विचार मिलता है। पूर्वकाल में राजमहलों और हवेलियों के निर्माण के समय द्वार निवेश पर प्रमुखता से विचार होता था। यह विचार आज भी सर्वथा प्रासंगिक है।

इस नियम के अनुसार पूर्व के क्रम से ईशान कोण से क्रमश: पहला और दूसरा क्षेत्र छोड़कर तीसरे और चौथे पद पर द्वार रखना चाहिए। ऐसे द्वार धन, धान्यप्रद, सरकार से सम्मान और रोजगार की दृष्टि से सुकून देने वाले होते हैं।

दक्षिण में आग्नेय कोण से क्रमश: तीन पद छोड़कर आगे के तीन पदों पर द्वार रखने से पुत्र-पौत्र, धन और यश की प्राप्ति होती है। पश्चिम में नैऋत्यकोण से दो पद छोड़कर चार पदों पर द्वार निवेश से धन-वैभव, विशेष संपदा और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार उत्तर में वायव्य से तीन पद छोड़कर क्रमश: तीन पदों पर द्वार रखने से धन संपदा, सुख और निरंतर आय की प्राप्ति होती है।

द्वार पर लगाया जाने वाला किवाड़ बिल्कुल पतला नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर भुखमरी या अर्थाभाव का सामना करना पड़ सकता है। यदि किवाड़ टेढ़ा-मेढ़ा हो जाए तो अमंगलकारी होता है। इस कारण दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है।

यदि किवाड़ में जोड़ गड़बड़ हो तो भवन मालिक कई कष्ट झेलता है। यह पारिवारिक शांति को प्रभावित करता है। यदि किवाड़ भवन के अंदर की ओर लटक जाए तो बहुत कष्टकारी और बाहर की ओर लटका हो तो वहां रहने वाले निरंतर प्रवास पर ही रहते हैं।

Saturday, January 5, 2008

ऑस्ट्रेलिया ने 122 रनों से दूसरा टेस्ट जीता

सिडनी.cricketभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में भारत की दूसरी पारी लड़खड़ा गई है और इस वक्त भारतीय बल्लेबाज गहरे दवाव में आ गए है। भारत ने ताजा समाचार मिलने तक 7 विकेट खोकर 185 रन बना लिए है। धोनी 35 रन बनाकर साइमंड्स की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। कप्तान अनिल कुंबले 27 रन बनाकर खेल रहे है। धोनी की जगह हरभजन बैटिंग करने मैदान में उतरे हैं। भारत को जीतने के लिए 333 रनों का लक्ष्य पार करना है।

पहला ओवर333 रन लक्ष्य लेकर उतरी भारतीय टीम को पहले ही ओवर में वसीम जाफर के विकेट गवाना पड़ा वे ब्रेट ली की गेंद पर क्लार्क के हाथों बिना कोई रन बनाए कैच आउट हो गए।

एस आर क्लार्क ने दिए भारत को तगड़े झटके

ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज एस आर क्लार्क ने संभलकर खेल रहे लक्ष्मण 20 को एलबी डब्लू आउट किया तथा उसके बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को 12 रनों पर बोल्ड कर भारतीय बल्लेबाजी पर गहरा दबाव बना दिया । सचिन एक बार फिर दुर्भाग्यशाली रहे जब गेंद उनके बल्ले का भीतरी किनारा लेकर विकेट से जा लगी और इस तरह से भारत का तीसरा विकेट 54 रन पर गिरा।

क्या भारत मैच बचा सकेगा?

सिडनी टेस्ट मैच में लाख टके का सवाल इस बात को लेकर है क्या भारत 3 विकेट खोने के बाद भी इस मैच में वापसी कर सकेगा और ऑस्ट्रेलिया के विजयरथ को रोकने में कामयाब हो सकेगा या नहीं ? अभी उसके 7 विकेट शेष है और अब समय आ गया है कि राहुल ,सौरव के साथ साथ युवराज सिंह और महैन्द्र सिंह धोनी को अपना सर्वोत्तम खेल खेलना होगा।

अब Hindi का जवाना है

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