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Sunday, December 9, 2007

बस पांच मीनत

सेहत. सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, सो एक बार फिर शुरू हो जाए वर्जिश। पर इस बार कुछ ऐसा करें की आलस न छाए और रोज़ाना कसरत की आदत बनी रहे। बस पांच मिनट कैसे..

हम हर बार सर्दियों में जोर-शोर से वर्जिश शुरू करते हैं, पर सर्दियां खत्म होने से पहले ही अधिकांश लोग पुराने र्ढे पर लौट आते हैं। बार-बार नए संकल्प के साथ कसरत शुरू करने और फिर कुछ दीनों बाद आलस पर वापस आ जाने की प्रव्र्त्तीकी शुरुआती उत्साह बहुत जल्दी काफूर हो जाता है? ये हैं कुछ ऐसे ज़रूरी कदम, जो कसरत समेत तमाम लक्ष्यों को हमारी आदत में शामिल करते हैं। से हर कोई लड़ चुका है। ऐसा क्यों होता है

* लक्ष्य हो सरल : कभी भी कठीन लक्ष्य न बनाएं। सलमान की तरह भुजाएं हासिल करने या रोज दो घंटे जिम में पसीना बहाने के संकल्प से बेहतर है कि आप सिर्फ पांच मिनट की वर्जिश से शुरू करें। आप यह आसानी से कर सकते हैं। आप महीने भर तक केवल पांच मिनट ही मेहनत करें और अगले महीने से उसे दस मिनट करें। इस तरह रोजाना की कसरत आपकी आदत में शामील होगी। पहले आसान से प्रारंभ करें, फिर उसे आदत बनाएं और तब व़क्त बढ़ाएं।

* तय करें : केवल यह कहना ही काफी नहीं है कि मैं कसरत करूंगा या सैर के लिए जाऊंगा। इसकी बजाय कितने समय तक वर्जिश करनी है, कब करनी है और कहां करनी है, ये सब कुछ तय होना चाहीए

* याद रखें : आप नहाने से पहले दांतों पर ब्रश अवश्य करते हैं। इसी तरह कुछ ऐसा तय करें की उसके पहले एक्सरसाइज़ करना कभी न भूल पाएं। लंच से पहले, ब्रेकफास्ट के पहले या नहाने से पहले, यह ‘ट्रिगर’ कुछ भी हो सकता है।

* माप सकें : आप निश्चित तौर पर बता सकें कि आज आपने अपने रोजाना के लक्ष्य को कहां तक पूरा किया। 10 मिनट की दौड़, आधा मील की सैर, पांच पुशअप्स के तीन सेट ऐसी संख्याएं हैं, जीन्हें बताया जा सकता है।

* लक्ष्य हो एक: एक महीने के लिए मात्र एक लक्ष्य पर दृष्टि रखें। हो सकता है कि आप महीना पूरा होने से पहले ही समय 20 मिनट तक बढ़ाना चाहें। पर इस उत्साह को आगे के लिए बचा कर रखें, क्योंकि एकाग्रता और धैर्य की असल परीक्षा तो अभी बाकी है।

* हिसाब रखें : रोजाना का हिसाब रखें, ताकि आपको पता लगता रहे कि कहां पहुंच रहे हैं। हीसाब-कीताब में जटिलता न रखें, सिर्फ तारीख, समय और आपने क्या कीया, यही लीखें

* दूसरों को बताएं : यह काफी महत्वपूर्ण है। अपने जीवनसाथी, मित्र या सहकर्मी, कीसी को भी दैनिक रिपोर्ट दे सकते हैं, हां यह ध्यान रखें कि उसे आपके लक्ष्य की जानकारी हो। वह आपसे रिपोर्ट की अपेक्षा रखे और आपके भूल जाने पर ख़ुद ही पूछ ले।

* प्रेरित हों : हर कीसी को प्रेरणा और प्रोत्साहन की ज़रूरत होती है। यदि लगातार दो दिनों तक वर्जिश न कर पाएं, तो स्वयं से पूछें कि ऐसा क्यों हुआ। समय-समय पर ख़ुद को प्रोत्साहित करते रहें। दूसरों से तारीफ मिले तो और भी बढ़िया है। परिवार और मित्रों का दबाव भी होना चाहिए, ताकि आप लक्ष्य को भूल न पाएं। जिस दिन आलस छाए या छुट्टी मार लेना आसान लगे, यह लेख एक बार और पढ़ें। यह सब तब तक जारी रखें, जब तक की कसरत आदत में न शामील हो जाए।

एड्स का इलाज!

जोधपुर. मारवाड़ में उगने वाली डेजर्ट एलोविरा (मीठा ग्वारपाठा) और मशरूम (खुम्बी) अब एड्स रोगियों के लिए फायदेमंद साबित होने लगी हैं। मानव कल्याण एलोविरा और मशरूम से एड्स का इलाज!संस्थान के निदेशक और सेवानिवृत्त चिकित्सा अधीकारीदिया है। डॉ.गंगासिंह चौहान ने काजरी के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ.ए.पी.जैन के सहयोग से एलोविरा और मशरूम के कैप्सूल तैयार किए हैं। एड्स रोगियों पर इनका परीक्षण करने पर अभूतपूर्व और चौंकाने वाले सुधार नजर आए। सफलता से उत्साहित डॉ.चौहान ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस रिसर्च का दायरा बढ़ाते हुए एड्स रोगियों पर बड़े स्तर पर कैप्सूल से इलाज करना शुरू कर

क्या हुआ फायदा : कैप्सूल से रोगियों के प्रमुख बायोलॉजिकल पैरामीटर्स न केवल थम गए, बल्कि उनका वजन भी बढ़ने लगा। सीडी टी कोशिका गणक में 61 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। 90 प्रतिशत रोगियों की सीडी कोशिका में बढ़ोतरी के साथ शारीरिक वजन में भी 9 से 10 किलो (प्रतिशत) बढ़ोतरी देखी गई। इसी तरह उनमें प्रथर ऐडेप्टोजन का खात्मा होना भी सामने आया।

फायदा दिखा, शोध जारी : राठौड़
डॉ.चौहान ने एड्स रोगियों पर किए इस शोध के बारे में हाल ही में डेजर्ट मेडिसिन रिसर्च सेंटर में पत्रवाचन किया। उन्होंने बताया कि एलोविरा और मशरूम के मिश्रण से तैयार इस कैप्सूल से एड्स रोगियों में काफी सुधार आया। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ने लगी। अभी इस पर रिसर्च जारी है। इसलिए रोगियों को मेडिसिन के साथ कैप्सूल दे रहे हैं।

गुणों की खान : जैन
डॉ.जैन ने बताया कि एलोविरा और मशरूम में आठ आवश्यक एमीनो एसिड, दस से बारह वसीय अम्ल और सभी आवश्यक विटामिन होते हैं। आधुनिक विज्ञान ने इनमें से कुल 200 तत्व खोज नीकाले हैं, जो न केवल पोषक, बल्कि रोगोपचार में सहायक हैं। इसके प्रयोग से एड्स रोगियों में प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ती है। उनके रोग प्रतिरक्षात्मक सुरक्षा घेरा भी मजबूत होता है। महीने भर तक इन कैप्सूलों को लेने पर तीन-चार सौ रुपए खर्चा आता है। इसकाकोई साइड इफेक्ट भी अभी तक नजर नहीं आया है।

पहले चूर्ण, फिर कैप्सूल
पहले एलोविरा और मशरूम को मिलाकर एक चूर्ण तैयार कीया गया। सादड़ी में एड्स रोगियों का इलाज करने वाली मानव कल्याण संस्थान ने कुछ एड्स रोगियों को यह चूर्ण दिया तो उनकी हालत में सुधार नजर आया। बाद में चूर्ण से कैप्सूल तैयार कीए गए।

घर का हकीम नीम

घर का वैद्य करार दीए गए नीम में औषधीय गुणों की भरमार है इसीलीये अब इसकी पत्तीयों का इस्तेमाल विभिन्न उत्पादों में कीया जाने लगा है। घर पर भी इसके प्रयोग से घर का हकीम नीमकाफी कुछ हासिल कीया जा सकता है।

वृक्षों में नीम ही एक ऐसा वृक्ष है जिसकी पत्ती से लेकर जड़ तक का औषधीय महत्व है। इसीलिए इसे प्राचीन समय से घर का वैद्य कहा जाता था। यही वजह है कि नीम अब सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई दवाओं, क्रीम, टूथ पेस्ट, शैम्पू तथा कीटाणुनाशकों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। नीम न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि प्रकृति को प्रदूषण से भी बचाता है।

नीम के गुण * नीम प्राकृतिक रूप से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

* इसका कड़वा स्वाद पित्त और कफ दोष में संतुलन बनाए रखता है।

* नीम की कोंपल खाने से खून साफ होता है। साथ ही यह लीवर तथा त्वचा के विषैले तत्वों को भी दूर करता है।

* सूखी खांसी होने पर नीम की पत्ती की चाय शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से राहत मीलती है।

* नीम की छाल को लौंग के साथ पीसकर उसे पेस्ट की तरह इस्तेमाल करें तो यह दांतों को कीड़े से बचाता है तथा मसूड़ों को मजबूत बनाता है। इससे सांसों में ताजगी भी बनी रहती है।

* त्वचा संबंधी समस्या होने पर नीम का तेल लगाने तथा नीम के पानी से स्नान करने से बीमारी से निजात पाई जा सकती है।

* नीम नाखून तथा बाल को भी स्वस्थ बनाता है। यह एंटीसेप्टिक भी है।

* ठंड के मौसम में नीम का पेस्ट बनाकर सीर में लगाएं तथा एक घंटे बाद धो लें। इससे रूसी का नामोनिशान मीट जाएगा तथा बाल भी नहीं झड़ेंगे।

न्यूट्रॉन बीम बताएगी पता

फ्लोरेंस (इटली). लियोनार्डो डा विंसी के खोए हुए मास्टरपीस का पता लगाने के लिए अब न्यूट्रॉन बीम्स (न्यूट्रॉन की किरणों) का इस्तेमाल किया जा रहा है। फ्लोरेंस के पैलाजो वेचियो की दीवार के पीछे इस कृति के होने की संभावना जताई जा रही है।

battle of anghiariआर्ट डायग्नोस्टीशियन मॉरीजियो सेरासिनी ने इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए 30 साल तक इंतजार किया है। सेरासिनी की टीम नवंबर में पैलाजो की 177 फीट लंबी दीवार का निरीक्षण करेगी और डा विंसी की कृति बैटल ऑफ अंघियारी की तलाश करेगी। 1.5 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस खोज अभियान को यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के सैन डियेगो सेंटर ऑफ इंटरडिसिप्लिनेरी साइंस फॉर आर्ट, आर्कीटेक्चर एंड आर्कियोलॉजी की ओर से चलाया जा रहा है।

1977 में आर्ट एंड आर्कीटैक्चरल डायग्नोस्टिक सेंटर एडीटैक की स्थापना के बाद सेरासिनी ने अब तक इंजीनियरिंग, आर्ट हिस्टरी और मेडिसिन की मदद से 2000 इमारतों और कलाकृतियों का अध्ययन किया है। सेरासिनी अपने आर्काइव के काम के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, इन्फ्रारेड, थर्मोग्राफी और अल्ट्रावॉयलेट डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं। एडीटैक की ओर से अब तक बॉटीसेली के एलेगरी ऑफ स्प्रिंग में थ्री ग्रेसेज और लियोनार्डो डा विंसी के एडोरेशन ऑफ द मैगी नाम की कलाकृतियों को खोजने में मदद की है। इसके बाद आई डॉन ब्राउन की किताब द डा विंसी कोड में उन्हें अकेले वास्तविक चरित्र का दर्जा मील सका।

क्या है न्यूट्रॉन्स बीम्स तकनीक
serraciniन्यूट्रॉन्स के जरिए कलाकृतियों की सार-संभाल का काम नया नहीं है। मॉरीजियो सेरासिनी का कहना है की न्यूट्रॉन एक्टिवेशन एनालीसिस नाम की इस तकनीक में न्यूट्रॉन्स की किरणों को छोड़ा जाता है, जो किसी चीज पर पड़ते ही उसके रसायनिक तत्वों से मीलती हैं और गामा कीरणों को तैयार करती हैं। इन किरणों को एक डिटेक्टर पकड़ लेता है। सेरासिनी के मुताबिक इसमें सबसे मुश्कील चीज हैं उपकरण जिनका इस्तेमाल इस तरह करना होता है की आप न्यूट्रॉन बीम्स को छोड़ने के बाद मील रहे निष्कर्षो का विश्लेषण ठीक से कर सकें। इसमें कई-कई हफ्ते भी लग सकते हैं और डाटा भी काफी धीरे-धीरे ही हासील हो पाता है।

सेरासिनी का कहना है कि हमें यह पता है की लियोनार्डो ने अपनी पेंटिंग्स में किन रसायनों का इस्तेमाल किया था इसलीये इनका पता लगाना आसान है। इसके बाद इस कृति की नकली इमेज मील सकती है, जीसमें यह भी पता चल जाएगा कि वह कहां है और कीतनी बड़ी है।

न्यूयार्क.मुंबई में जन्मी और वर्तमान में न्यूयार्क में रहने वाली पेंटर सियोना बैंजामिन 23 नवंबर को न्यूयार्क में आयोजित होने वाली ग्रुप एग्जीबिशन में अपनी कलाकृतियों के साथ शामिल होंगी। न्यूयार्क के प्रतिष्ठित आर्ट इंस्टीच्यूशन ने इस कला प्रदर्शनी के लीये 11 कलाकारों को आमंत्रित किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को ज्यादा यादगार बनाने के लिए ही इन दिनों वे अपनी कलाकृतियों को फिनिशिंग टच देने में व्यस्त हैं।

सियोना का कहना है कि वे पेंटिंग की पारंपरिक स्टाइल को ज्यादा पसंद करती हैं। उन्होंने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से ग्रैजुएशन कीया है।

सियोना कहती हैं‍ उनकी हमेशा से ही ख्वाहिश थी कि वे लाइट बॉक्स क्रिएट करें, क्योंकी वे मुंबई में रही हैं और वहां फिल्मों का बड़ा क्रेज है। वे जब भी फिल्म देखने जाती थीं तो लाइट बॉक्स में फिल्मों के पोस्टर देखती थीं। ये पोस्टर उन्हें बहुत प्रभावित करते थे। फिल्मों के प्रति अपने शौक को उन्होंने मिक्स मीडीयाकीया गया है। नामक क्रिएशन में भी उतारा है। इसे उनके कॉलेज में भी प्रदर्शित

उनकी प्रदर्शनी ‘पैंटोमाइम इन परदेस’ डिसप्ले बॉक्स में टीवी स्टिल की तरह दिखाई देंगी। सीयोना बड़े दार्शनिक अंदाज में कहती हैं की उनके काम में उनके जीवन का प्रभाव साफ देखा जा सकता है। वे रोजमर्रा की घटनाओं तथा आस-पास की चीजों से अपनी कला के लिए प्रेरणा लेती हैं।

Saturday, December 8, 2007

रोलिंग इटरटेंनर ऑफ द ईयर

न्यूयार्क.हैरी पॉटर की प्रख्यात लेखिका जे. के. रोलिंग को न्यूयार्क की एक प्रसीद्ध साप्ताहीक मनोरंजनपत्रिका इंटरटेंमेंट ने 2007 का इटरटेंनर ऑफ ईयरघोषीत करते हुए उनहें प्रथम पेज पर स्थान दिया है

पत्रिका कहती है की हैरी पॉटर की लेखिका जे. के. रोलिंगकी बॉय विजार्ड सीरिज की लगभग ४क्क् मिलियनकॉपीज का बीकना और फिर इस पर बनीं फिल्म केनिमार्ण के बाद जबरदस्त सफलता प्राप्त करना एकबड़ी बात है और वे वास्तव में इस पुरुस्कार की वास्तविकहकदार है

पत्रिका की इस सीरिज में पांच अन्य श्रेणियां भी हैमोस्ट पापुलर श्रेणी में मेट डेमॉन को स्थान मिला है वहींकलाकार , निर्देशक , एक्टविस्ट जार्ज क्लूनीवेलडिक्टोरियन के तहत शीर्ष पर स्थान दिया गया है

जोआन रोलिंग से जे. के. रोलिंग तककुछ लोग बेसकइस बात को मानते हो की नाम में क्या रखा है? लेकिन आप जे के रोलिंग की जिंदगी में देखे तो पाएंगे कि नाम मेंभी बहुत कुछ रखा हैदरअसल जेके रोलिंग का असली नाम जोआन रोलिंग था लेकिन उनहोंने अपनी पहलीकिताब के प्रकाशन के समय प्रकाशकों की बात मानकर अपने नाम के आगे जे. के. रोलिंग लिखना शुरू करदिया थाप्रकाशकों का मानना था कि किसी महिला के बजाय पुरूष का नाम होगा तो रीडर को किताब में ज्यादादम लगेगा इसलिए उनहोंने अपने नाम के आगे जे. के .लिखना शुरू कर दिया और किताब के कवर के पर लिखेइस नाम से यह पता भी नहीं चलता था कि लेखक पुरूष है या महिलाआज यहीं नाम इटरटेंनर ऑफ ईयरघोषित हुआ है और हैरी पॉटर और जे. के. रोलिंग के लेखन का जादू पूरे संसार में लोंगो के सर चढ़कर बोल rahaa है

डोडी ने बनाया था प्लान

लंदन.Dianaपूर्व प्रिंसेस डायना के ब्वॉय फ्रैंड डोडी अल फयाद ने पैपेराजी की निगाहों से बचने के लिए पेरिस स्थित रिट्ज होटल के पिछले दरवाजे से निकलने का प्लान बनाया था। उल्लेखनीय है कि इसी होटल से डोडी और डायना मर्सिडिज में सवार होकर निकले थे और पेरिस के टनेल के पास हादसे का शिकार हो गए थे। हादसे में दोनों की मौत हो गई थी।

इस मामले की तहकीकात के दौरान रिट्ज होटल के मैनेजर थिएरी रोचर ने बताया कि उसने डोडी की सारी योजना सुन रखी थी। इस योजना में यह तय किया गया कि किसी प्रोफेशनल ड्राईवर की जगह हेनरी पॉल गाड़ी को चलाकर ले जाएंगे। यह सारी कवायद डायना को पैपेराजी से बचाने के लिए की गई थी।

हेनरी पॉल रिट्ज होटल में डायरेक्टर ऑफ सिक्युरिटी के पद पर कार्यरत थे । रोचर ने बताया कि हादसे की रात पॉल ने शराब पी रखी थी। रोचर का कहना कि डोडी परिवार से गहरे संबंधों के कारण वे पॉल को कुछ नहीं कह सके। रोचर ने कहा कि पॉल की जगह यदि होटल का कोई और कर्मचारी ऐसे शराब पी रहा होता तो बर्खास्त कर दिया जाता।

गौरतलब है कि हादसे की जांच करने वाली फ्रांस और ब्रिटेन की पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पॉल ने सीमित मात्रा में शराब पी रखी थी। 31 अगस्त 1997 को पेरिस में एक कार दुर्घटना में प्रिंसेस डायना, डोडी और हेनरी पॉल की मौत हो गई थी।

डोडी के पिता मोहम्मद अल फयाद ने आरोप लगाया कि इस हादसे के पीछे ब्रिटिश राजघराने का हाथ रहा है। उनका कहना है कि प्रिंस फिलिप को इस बात की सूचना थी कि डोडी और डायना शादी करने वाले है इसलिए ब्रिटिश सेक्रेट सर्विस के जरिए इस हादसे को अंजाम दिया गया।

अब Hindi का जवाना है

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